वाशिंगटन, डिजिटल डेस्क : अमेरिका ने पूर्वी तिब्बत में स्थित बौद्ध मठ में धर्मगुरुओं के आवासीय भवनों को गिराए जाने पर चीन की आलोचना करते हुए उसे तिब्बत के धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप न करने की अपील की है। भारत के धर्मशाला स्थित तिब्बत की निर्वासित सरकार केंद्रीय तिब्बत प्रशासन (सीटीए) ने भी इस घटना की कड़ी आलोचना की है। रेडियो फ्री एशिया (आरएफए) के सूत्रों के अनुसार, चीनी अधिकारियों ने 25 व 26 अक्टूबर को तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के कार्दजे (गांजी) के सेरशुल काउंटी में ध्वस्तीकरण अभियान चलाया था। इस क्रम में द्जा सेरशुल थेकचेन दार्ग्येलिंग मठ में 200 धर्मगुरुओं के आवास ध्वस्त कर दिए गए। सूत्रों के अनुसार, घटनास्थल पर अब कुछ नहीं बचा है, सबकुछ जमींदोज हो चुका है। घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया में अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता ने आरएफए को बताया कि ये तोड़फोड़ की कार्रवाई, तिब्बत में आध्यात्मिक संस्थानों, धार्मिक शिक्षा और मठवासी जीवन पर नियंत्रण करने के लिए चीनी सरकार के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है। वहीं, सीटीए प्रवक्ता तेनजिन लेकशय ने कहा कि चीन सरकार लगातार तिब्बतियों द्वारा स्थापित मठों और स्कूलों को बंद कराने का प्रयास कर रही है और तिब्बतियों की राष्ट्रीय पहचान मिटाने में जुटी है। Post navigation पाकिस्तान में हिंदुओं के उत्पीड़न पर ब्रिटिश सांसद ने जताई चिंता भूटान में ग्लेशियल झील फटने की चेतावनी, उत्तर बंगाल में बाढ़ का हाई-अलर्ट