हाइकोर्ट ने वर्ष 1980 में हुए बैनामा व दाखिल खारिज के आदेश को निरस्त किये जाने के आदेश पर लगाई रोक

ALLAHBAD-HIGH-COURT (3)

प्रयागराज,संवाददाता : गोरखपुर तहसील खजनी,ग्राम अनन्तपुरवा के अनुसूचित जाति के सोमई नामक व्यक्ति ने अपनी जमीन सामान्य जाति के ब्राम्हण समाज के लालचंद, तप्पे ,किशुनचंद को बैनामा 1980 में कर दिया था। बैनामा करने के बाद सोमई के पास 1.26 हेक्टयर से ज्यादा जमीन बची थी।

इसी गांव की याची सीमा देवी ने वर्ष 2012 में तप्पे व किशुनचंद से जमीन का बैनामा दाखिल खारिज करा लिया।याची के गाँव के रहने वाले गौरी शंकर मिश्रा व शिव शंकर मिश्रा ने याची से दुश्मनी होने के कारण 1980 में हुए दाखिल खारिज के वाद में कायमी प्रार्थना पत्र डालकर बैनामे को निरस्त किये जाने की प्रार्थना पर बिना याची को सुने एक पक्षीय आदेश पारित कर बैनामा निरस्त कर सरकार के नाम दर्ज किए जाने के आदेश न्यायालय उपजिलाधिकारी ने कर दिया।

याची ने उस आदेश के खिलाफ कमिश्नर के यहां अपील फ़ाइल करने पर दोनो पक्ष को सुनकर आदेश पारित करने को कहा। पुनः उपजिलाधिकारी व अपर कमिश्नर ने याची के विरुद्ध आदेश कर दिया, जिसके खिलाफ याची ने हाइकोर्ट में याचिका दाखिल किया।

याची की ओर से अधिवक्ता सुनील चौधरी ने मां. न्यायमूर्ति चंद्र कुमार राय के समक्ष बहस में बताया कि याची सीमा देवी ने वर्ष 2012 में जमीन तप्पे व किशुनचंद से खरीदी थी। विपक्षी की प्रार्थना पत्र पर याची को बिना सुने बैनामा खारिज करने आदेश कर दिया गया,जबकि याची दाखिल खारिज में आवश्यक पार्टी है। विपक्षी का कोई भी लेना देना नही है और न ही 32 साल देरी का कारण बताया और सोमई की मृत्यु के बाद उसके वारिसों को बिना पार्टी बनाये अवैध तरीके से निचली अदालत को गुमराह कर आदेश पारित करा लिया गया है। याची के अधिवक्ता ने बताया कि 1980 में उत्तरप्रदेश जमींदारी विनाश अधिनियम के तहत अनुसूचित जाति के सदस्यों द्वारा भूमि के अंतरण पर रोक नही था।

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