Abhayrab Vaccine पर IIL ने ऑस्ट्रेलियाई चेतावनी को बताया भ्रामक

Abhayrab-Vaccine

नई दिल्ली, न्यूज़ डेस्क : Abhayrab Vaccine : भारत की अग्रणी वैक्सीन निर्माता कंपनियों में से एक इंडियन इम्यूनोलॉजिकल्स लिमिटेड (IIL) ने मानव एंटी-रेबीज वैक्सीन ‘अभयरैब’ को लेकर सामने आई हालिया खबरों पर शनिवार को स्पष्टीकरण जारी किया है। कंपनी ने ऑस्ट्रेलियाई स्वास्थ्य एजेंसियों की ओर से जारी परामर्श को अत्यधिक सतर्कता भरा और भ्रामक बताते हुए सख्ती से खारिज किया है।

IIL ने अपने बयान में कहा कि अभयरैब रेबीज वैक्सीन के जिस कथित नकली बैच बैच नंबर KA24014 (निर्माण तिथि मार्च 2024, समाप्ति तिथि फरवरी 2027) का उल्लेख किया जा रहा है, उसकी पहचान जनवरी 2025 की शुरुआत में ही कर ली गई थी। कंपनी के अनुसार, यह नकली बैच अब बाजार में उपलब्ध नहीं है और इसे तुरंत वापस ले लिया गया था।

इससे पहले इसी सप्ताह ऑस्ट्रेलियन टेक्निकल एडवाइजरी ग्रुप ऑन इम्यूनाइजेशन (ATAGI) ने चेतावनी जारी करते हुए दावा किया था कि 1 नवंबर 2023 से भारत में अभयरैब वैक्सीन के नकली बैच प्रचलन में हैं। एडवाइजरी में यह भी कहा गया था कि 1 नवंबर 2023 के बाद भारत में जिन ऑस्ट्रेलियाई यात्रियों को अभयरैब वैक्सीन लगाई गई है, उन्हें उस टीकाकरण को अमान्य मानते हुए नया कोर्स शुरू करना चाहिए।

अभयरैब वैक्सीन की 40 देशों में 21 करोड़ से अधिक खुराकें दी गई

कंपनी ने बताया कि 2000 से अभयरैब वैक्सीन का निर्माण हो रहा है और 40 देशों में 21 करोड़ से अधिक खुराकें दी गई हैं

रेबीज एक वायरल ज़ूनोटिक बीमारी है, जो केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करती है। लक्षण सामने आने के बाद यह लगभग हमेशा जानलेवा होती है, हालांकि समय पर चिकित्सा हस्तक्षेप से इससे बचाव संभव है।कंपनी ने बताया कि अभयरैब वैक्सीन का निर्माण वर्ष 2000 से किया जा रहा है और अब तक भारत समेत 40 से अधिक देशों में 21 करोड़ से ज्यादा खुराकों की आपूर्ति की जा चुकी है। वर्तमान में भारत में इस वैक्सीन की बाजार हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत है।

IIL ने कहा, “जनवरी 2025 में एक विशेष बैच में पैकेजिंग से जुड़ी असामान्यता की पहचान होते ही कंपनी ने तत्काल भारतीय नियामक संस्थाओं और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को सूचित किया। इसके साथ ही औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई और संबंधित अधिकारियों के साथ मिलकर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की गई।” कंपनी ने स्पष्ट किया कि यह एक अलग-थलग घटना है।

हर वैक्सीन बैच को उपयोग से पहले केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला द्वारा जांच और मंजूरी

स्वास्थ्य कर्मियों और आम जनता को आश्वस्त करते हुए IIL ने कहा कि भारत में निर्मित वैक्सीन के प्रत्येक बैच को बिक्री या उपयोग से पहले केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला (सेंट्रल ड्रग्स लेबोरेटरी), भारत सरकार द्वारा जांच और स्वीकृति दी जाती है। IIL में क्वालिटी मैनेजमेंट के वाइस प्रेसिडेंट एवं प्रमुख सुनील तिवारी ने कहा, “सरकारी संस्थानों और अधिकृत वितरकों के माध्यम से की गई सभी आपूर्तियां पूरी तरह सुरक्षित और मानक गुणवत्ता की हैं।”

कंपनी ने ऑस्ट्रेलियन टेक्निकल एडवाइजरी ग्रुप ऑन इम्यूनाइजेशन को लिखे पत्र में यह भी स्पष्ट किया है कि अभयरैब एक शुद्ध सेल-कल्चर आधारित रेबीज वैक्सीन है, जिसे विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिसेज़ (GMP) सहित सभी लागू नियामक मानकों के अनुरूप तैयार किया जाता है। यह वैक्सीन रेबीज से बचाव के लिए प्री-एक्सपोज़र और पोस्ट-एक्सपोज़र दोनों स्थितियों में उपयोग की जाती है।

इस बीच, इसी महीने की शुरुआत में सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) ने भी भारत और हैती के लिए स्वास्थ्य चेतावनी जारी की थी, जब इन देशों से लौटे यात्रियों में रेबीज की पुष्टि हुई थी। CDC ने अपनी एडवाइजरी में यात्रियों को कुत्तों, बिल्लियों और जंगली स्तनधारियों के संपर्क से बचने की सलाह दी है।