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रायपुर ,संवाददाता : जंगल की पगडंडियों से रैंप की रोशनी तक का सफर आसान नहीं होता। सुकमा के माओवादी पुनर्वास केंद्र से आईं आठ युवतियों ने जब प्रोफेशनल माडलों के साथ राजधानी के डीडीयू आडिटोरियम में रैंप पर कदम रखा तो यह सिर्फ फैशन शो नहीं, बल्कि बदलाव की कहानी बन गई। नेशनल हैंडलूम डे पर आयोजित इस फैशन शो की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर भी चर्चा में हैं। इन युवतियों में कई कभी माओवादी संगठन से जुड़ी रही हैं और हिंसक घटनाओं का हिस्सा भी बनीं।

फैशन शो में ट्राइबल ब्यूटी

जंगल और कठिन परिस्थितियों के बीच बीता उनका जीवन रैंप की चमक-दमक से बिल्कुल अलग था। करीब एक सप्ताह की ट्रेनिंग में उन्हें रैंप वाक, बाडी लैंग्वेज, प्रस्तुति और दर्शकों के सामने आत्मविश्वास से खड़े होने का अभ्यास कराया गया। शुरुआत में झिझक थी, लेकिन मंच पर पहुंचते ही उनके कदमों में

तालियों की गूंज के बीच आगे बढ़ती युवतियों की प्रस्तुति महज फैशन नहीं, बल्कि अतीत से बाहर निकलकर नई पहचान बनाने की कोशिश भी थी। मीड़ियम गंगी, माड़वी नंदिनी, पोडियम राजे, माड़वी देवे, माड़वी मल्ले, डोडी रामे, पूनम देवे और पूनम ज्योति ने रैंप वाक में हिस्सा लिया।

मीड़ियम गंगी…पहली बार लगा, जिंदगी में नई राह भी है

रैंप वाक का अनुभव मीड़ियम गंगी के लिए पूरी तरह नया था। शुरुआत में उन्हें मंच और दर्शकों के सामने चलने को लेकर डर लगा। अभ्यास के दौरान धीरे-धीरे झिझक कम हुई और आत्मविश्वास बढ़ा। अंतिम प्रस्तुति में प्रोफेशनल माडलों के साथ कदम मिलाते हुए उन्हें अलग तरह का अनुभव हुआ। उनका कहना है कि पहले कभी नहीं सोचा था कि इतने लोगों के सामने इस तरह रैंप पर चलने का मौका मिलेगा। दर्शकों की तालियों ने उन्हें आगे बढ़ने का हौसला दिया। उनके लिए यह अनुभव इसलिए भी खास रहा क्योंकि इससे उन्हें महसूस हुआ कि जिंदगी में पुराने रास्तों के अलावा नई राहें भी हो सकती हैं।

पूनम देवे … घबराहट से आत्मविश्वास तक

पूनम देवे को शुरुआत में रैंप देखकर ही घबराहट होती थी। मंच पर लोगों के सामने चलना और अपनी प्रस्तुति पर ध्यान देना उनके लिए आसान नहीं था। लगातार अभ्यास से उन्होंने अपने कदमों और बॉडी लैंग्वेज पर नियंत्रण बनाना सीखा। धीरे-धीरे डर कम हुआ और आत्मविश्वास बढ़ा। अंतिम दिन जब वह रैंप पर उतरीं तो शुरुआती झिझक नजर नहीं आई। पूनम का कहना है कि इस अभ्यास से उन्हें समझ आया कि आत्मविश्वास के साथ कई ऐसी चीजें भी की जा सकती हैं, जिनके बारे में पहले कल्पना नहीं की थी। कार्यक्रम ने उन्हें खुद को नए नजरिए से देखने का मौका दिया।

माड़वी नंदिनी … पुराने जीवन से आगे निकलने का एहसास

माड़वी नंदिनी के लिए रैंप वाक का अनुभव यादगार रहा। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने प्रस्तुति देने और लोगों के सामने सहज रहने का अभ्यास किया। शुरुआत में संकोच था, लेकिन अभ्यास के साथ वह कम होता गया। रैंप पर कदम रखते समय उन्हें एक अलग तरह का एहसास हुआ। उन्हें लगा कि वह अपने पुराने जीवन से आगे बढ़ रही हैं। मंच पर मिली प्रतिक्रिया ने इस भावना को और मजबूत किया। नंदिनी के लिए यह अवसर इस बात का संकेत था कि परिस्थितियां बदलने के साथ जीवन की दिशा भी बदली जा सकती है। उनके मुताबिक प्रशिक्षण ने उन्हें अपनी क्षमताओं को पहचानने का अवसर दिया।

डोडी रामे … रैंप से ज्यादा खुद को पहचानना अहम

डोडी रामे के लिए यह कार्यक्रम केवल फैशन से जुड़ा आयोजन नहीं था। उन्होंने इसे खुद को नए रूप में देखने का मौका माना। रैंप पर उतरने से पहले उनके मन में भी झिझक थी, लेकिन अभ्यास के बाद आत्मविश्वास बढ़ा। दर्शकों की प्रतिक्रिया ने उन्हें सहज होने में मदद की। उनके लिए सबसे खास बात यह रही कि लोगों ने उन्हें प्रोत्साहन दिया। डोडी के अनुसार इस अनुभव ने उन्हें महसूस कराया कि व्यक्ति के भीतर कई ऐसी क्षमताएं हो सकती हैं, जिन्हें सही अवसर मिलने पर सामने लाया जा सकता है। रैंप उनके लिए इसी अवसर का प्रतीक बन गया।