कुलदीप जघीना हत्याकांड में अपराधी अरुण फौजी पर पचास हजार रुपये का इनाम

ARUN-FAUJI

अलीगढ़, संवाददाता : एक दशक पहले तक कई राज्यों की पुलिस अरुण फौजी के पीछे लगी थी, लेकिन पिछले लंबे समय से वह शांत था। खुद उसके गृह जनपद अलीगढ़ में पुलिस उसे भुला बैठी थी। उस पर अलीगढ़ में भले ही कम मामले दर्ज हैं लेकिन उसके कारनामे बड़े हैं।

एक दशक पहले तक पश्चिमी यूपी, दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान व हरियाणा पुलिस की आंखों की किरकिरी रहा कुख्यात अरुण उर्फ फौजी फिर सुर्खियों में है। भरतपुर पुलिस ने एनएजी कमांडो ट्रेनिंग प्राप्त कुख्यात पेशेवर अपराधी अरुण फौजी पर बहुचर्चित कुलदीप जघीना हत्याकांड में पचास हजार रुपये का इनाम घोषित किया है। इसके बाद राजस्थान पुलिस के साथ अलीगढ़ पुलिस और यूपी एसटीएफ भी सक्रिय हो गई है।

बता दें कि कुछ वर्ष पहले जेल से छूटने के बाद अरुण फौजी पत्नी बच्चों के साथ भरतपुर बस गया था। तब से वहीं रह रहा था। गत जुलाई माह में भाजपा नेता की हत्या के आरोपी कुलदीप जघीना की दिनदहाड़े पुलिस अभिरक्षा में टोल नाके के पास उस समय हत्या कर दी गई थी, जब पुलिस जयपुर जेल से उसे पेशी पर भरतपुर लेकर आ रही थी।

पुलिस विवेचना में अरुण कुमार उर्फ फौजी उर्फ गुड्डा पुत्र हरीशरण जाट निवासी लौहर्रा थाना लोधा जिला अलीगढ़ हाल निवासी सूरजमल नगर थाना मथुरा गेट भरतपुर सहित यूपी के अन्य अपराधियों के नाम सामने आए थे। इनमें मथुरा के सौंख मगोर्रा का शेर सिंह उर्फ शेरा हाल जसवंत नगर थाना अटलबंद जिला भरतपुर का नाम भी शामिल है। अब एसपी भरतपुर की रिपोर्ट पर आईजी रूपिंदर सिंह ने अरुण फौजी सहित सभी चार फरार अपराधियों पर इनाम राशि 25 से बढ़ाकर 50-50 हजार रुपये कर दी है।

अरुण फौजी का आपराधिक इतिहास

एक दशक पहले तक कई राज्यों की पुलिस अरुण फौजी के पीछे लगी थी, लेकिन पिछले लंबे समय से वह शांत था। खुद उसके गृह जनपद अलीगढ़ में पुलिस उसे भुला बैठी थी। उस पर अलीगढ़ में भले ही कम मामले दर्ज हैं लेकिन उसके कारनामे बड़े हैं। उसे पूर्व में राजस्थान की एक बैंक डकैती में सजा भी सुनाई जा चुकी है। जिसके बाद उसे 2015 में अपने पैतृक गांव ल्हौर्रा की प्रधानी गंवानी पड़ी थी। उसके साथ संदीप उर्फ निक्की ठाकुर निवासी हरदुआ थाना हरदुआगंज, सतपाल निवासी सरौता कुम्हेर भरतपुर, हरेंद्र उर्फ गुड्डा निवासी माती बसईं थाना गोंडा, श्याम पाठक निवासी जसराना फीरोजाबाद को सजा सुनाई गई थी।

बहनोई की परिवारिक रंजिश में सेना का जवान बन गया जरायम का कुख्यात
अरुण फौजी सेना में 1994 में सेना में भरती हुआ। इसके बाद वर्ष 2000 में उसने मानेसर में एनएसजी कमांडो का प्रशिक्षण लिया और ग्रेडनर (हैंड ग्रेनेड फेंकने वाला) की ट्रेनिंग ली। कुछ समय के लिए वह यूपी में राज्यपाल की सुरक्षा फ्लीट में भी तैनात रहा। खैर में बहनोई की पारिवारिक व रिश्तेदारी की रंजिश से उसने जरायम दुनिया में कदम रखा। सेना से अवकाश पर आने के दौरान करीब 21-22 साल पहले बुलंदशहर में बैंक की कैश वैन लूटने में सिविल लाइंस इलाके से गिरफ्तार हुआ। इसके बाद उसने सेना से सेवानिवृत्ति ले ली और फिर अपराध की दुनिया में कूद गया।

इस दौरान उसने राजस्थान, पश्चिमी यूपी, एनसीआर, मैनपुरी, हरियाणा में कई बड़े अपराध किए। इनमें सोनू गौतम के साथ श्रीधाम एक्सप्रेस हत्याकांड, एनसीआर से आईओसी इंजीनियर का अपहरण, अकराबाद में पूर्व विधायक के भतीजे को कार सहित हाईजैक कर लूटपाट करने, मैनपुरी में लूट सहित कई बैंक डकैतियां, अपहरण, हत्याओं आदि के 31 से ज्यादा अपराध एक दशक पहले तक उसके नाम पर दर्ज थे।

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