भारत-EU ट्रेड डील : इन छह सेक्टरों और छह से अधिक राज्यों को होगा बड़ा फायदा

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नई दिल्ली, न्यूज़ डेस्क : भारत और 27 देशों वाले यूरोपीय यूनियन (ईयू) के बीच व्यापार समझौते से छह सेक्टरों और छह से अधिक राज्यों को इसका खासा लाभ मिलने जा रहा है। इन सभी सेक्टरों में एमएसएमई की 50 प्रतिशत से अधिक की हिस्सेदारी है।

ये सेक्टर हैं

टेक्सटाइल : इस पर अभी ईयू में 12 प्रतिशत का शुल्क लगता है। व्यापार समझौता लागू होते ही यह शून्य हो जाएगा। ईयू सालाना 263 अरब डालर के टेक्सटाइल का आयात करता है और इसमें भारत की हिस्सेदारी सिर्फ 7.2 अरब डालर की है। इसलिए इस शून्य शुल्क को बड़े मौके रूप में देखा जा रहा है।

पंजाब में लुधियाना को गारमेंट इंडस्ट्री के लिए जाना जाता है। वहीं जालंधर के स्पो‌र्ट्स गुड्स का निर्यात ईयू में पहले से हो रहा है। पंजाब से इंजीनियरिंग आइटम्स का भी निर्यात होता है। इन आइटम्स पर शुल्क समाप्त होने से निर्यात बढ़ेगा। उत्तर प्रदेश को भी इसका लाभ मिलेगा।

केमिकल्स : ईयू के बाजार में केमिकल्स के निर्यात पर 13 प्रतिशत तक शुल्क लगता है। फार्मा व केमिकल्स पर ईयू के बाजार में 3-5 प्रतिशत शुल्क लगता है जो अब जीरो हो जाएगा। ईयू सालाना 500 अरब डालर के केमिकल्स व फार्मा का आयात करता है, इसमें भारत की हिस्सेदारी सिर्फ 10 अरब डालर है। यहां भी निर्यात बढ़ाने का बड़ा मौका है। इससे गुजरात में भरूच एवं वडोदरा के केमिकल उद्योग के निर्यात को प्रोत्साहन मिलेगा।

प्लास्टिक व रबर : ईयू सालाना 317 अरब डालर के प्लास्टिक व रबर का आयात करता है, इसमें भारत की हिस्सेदारी सिर्फ 2.4 अरब डॉलर की है

प्लास्टिक व रबर : ईयू सालाना 317 अरब डालर के प्लास्टिक व रबर का आयात करता है, इसमें भारत की हिस्सेदारी सिर्फ 2.4 अरब डॉलर की है। भारतीय प्लास्टिक व रबर पर ईयू के बाजार में अभी छह प्रतिशत शुल्क लगता है जो शून्य हो जाएगा।

लेदर फुटवियर : इस पर अभी ईयू में 17 प्रतिशत शुल्क लगता है जो समझौते पर अमल के बाद शून्य हो जाएगा। ईयू सालाना 100 अरब डॉलर के फुटवियर का आयात करता है, इसमें भारत की हिस्सेदारी सिर्फ 2.4 अरब डॉलर की है। यहां भी निर्यात बढ़ाने की पूरी गुंजाइश है।

उत्तर प्रदेश के कानपुर, आगरा और सहारनपुर जैसे शहरों में लेदर फुटवियर का उद्योग काफी फैला है और यहां से यूरोप में फुटवियर का निर्यात भी होता है। यहां के निर्यातकों को लाभ मिलने जा रहा है।

समुद्री उत्पाद : ईयू अभी भारतीय समुद्री उत्पादों पर 26 प्रतिशत शुल्क वसूलता है जिससे ईयू को समुद्री उत्पादों का निर्यात बढ़ नहीं पा रहा है। समझौते के बाद यह शुल्क जीरो हो जाएगा। भारत ईयू में मात्र एक अरब डालर के समुद्री उत्पादों का निर्यात करता है, जबकि ईयू सालाना 53 अरब डालर के समुद्री उत्पादों का आयात करता है।

इससे बंगाल एवं आंध्र प्रदेश से समुद्री उत्पादों का निर्यात बढ़ेगा

इससे बंगाल एवं आंध्र प्रदेश से समुद्री उत्पादों का निर्यात बढ़ेगा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कृषि तो पूर्वी उत्तर प्रदेश की सब्जी व फल के निर्यात को भी प्रोत्साहन मिलेगा। मेरठ के स्पो‌र्ट्स गुड्स को भी प्रोत्साहन मिलेगा। बंगाल की चाय की मांग भी यूरोप में बढ़ेगी।

जेम्स एवं ज्वैलरी : जेम्स एवं ज्वैलरी पर अभी ईयू में चार प्रतिशत का शुल्क लगता है। भारत ईयू में 2.7 अरब डालर का निर्यात करता है, जबकि ईयू सालाना 79.2 अरब डालर के जेम्स एवं ज्वैलरी का आयात करता है। इसलिए जेम्स एवं ज्वैलरी के निर्यात में भी बढ़ोतरी की बड़ी संभावना है।

इससे गुजरात के सूरत से जेम्स एवं ज्वैलरी के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। राजस्थान के हैंडीक्राफ्ट्स उद्योग को लाभ मिलेगा। ईयू में हैंडीक्राफ्ट्स निर्यात की काफी गुंजाइश है। तमिलनाडु के इलेक्ट्रानिक्स आइटम्स के निर्यात में भी बढ़ोतरी होगी।

भारत में ईयू के लिए कितना कम होगा ऑटो व वाइन पर शुल्क

ईयू की वाइन पर अभी भारत में 150 प्रतिशत शुल्क लगता है जिसे 7-10 वर्षों में कम करके 30 प्रतिशत तक लाया जाएगा। शराब पर 150 प्रतिशत के शुल्क को 7-10 वर्षों में 40 प्रतिशत तक लाया जाएगा, तो बीयर पर लगने वाले 110 प्रतिशत के शुल्क को 50 प्रतिशत किया जाएगा।

ईयू की कारों पर अभी 100-125 प्रतिशत का शुल्क लगता है जिसे चरणबद्ध तरीके से अगले सात वर्षों में 10 प्रतिशत तक लाया जाएगा, लेकिन यह छूट सिर्फ 2.5 लाख कारों के लिए होगी, अधिक कारें आने पर उन पर पुरानी दरों से शुल्क लगेगा।

सीबैम पर नहीं बनी बात

ईयू ने इस वर्ष एक जनवरी से कार्बन बार्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (सीबैम) के तहत आयात होने वाली वस्तुओं पर उनके निर्माण के दौरान कार्बन उत्सर्जन के हिसाब से अलग से टैक्स लगाना शुरू कर दिया है। भारत ने व्यापार समझौते पर वार्ता के दौरान सीबैम हटवाने की कोशिश की थी, लेकिन इसमें सफलता नहीं मिली।

मुख्य रूप से भारत के स्टील एवं एल्युमीनियम निर्यात पर फर्क पड़ेगा क्योंकि भारत में भी ग्रीन स्टील या ग्रीन एल्युमीनियम का उत्पादन नहीं के बराबर होता है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बताया, ईयू ने कहा है कि अगर किसी भी देश को ईयू सीबैम में राहत देता है तो भारत को भी इसका लाभ मिलेगा।

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