CM मोहन यादव 115.35 करोड़ से बदलेंगे अशोकनगर की सूरत

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भोपाल/अशोकनगर, संवाददाता : mp news : रंग पंचमी के मौके पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अशोकनगर जिले के लिए खुशियों का पिटारा खोल दिया। उन्होंने 8 मार्च को यहां 115 करोड़ 35 लाख रुपये की लागत के 50 विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमि-पूजन किया। उन्होंने करीला माता धाम में आयोजित कार्यक्रम में सहभागिता भी की। सीएम डॉ. यादव ने विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को हितलाभ दिए। इससे पहले उन्होंने वनोपज, कृषि आधारित उत्पादों और स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मद्देनजर उन्होंने विभिन्‍न क्षेत्रों में उत्‍कृष्‍ट कार्य करने वाली जिले की सात महिलाओं को सम्‍मानित भी किया।

महिलाओं के कल्याण के लिए कई योजनाएं चलाई
इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार महिलाओं के कल्याण के लिए अनेको योजनाएं संचालित कर रही है। साथ ही, आगामी लोकसभा-विधानसभा निर्वाचन में भी 33 प्रतिशत महिलाओं को आरक्षण दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि लाड़ली बहनों को प्रदेश सरकार हर महीने 1500 रुपये दे रही है। महिलाओं को विभिन्न विभागों में आरक्षण देकर उच्च पदों पर नियुक्ति दी गईं हैं। किसान कल्याण वर्ष का आयोजन प्रदेश में किया जा रहा है। किसानों के उत्थान के लिए केंद्र सरकार और राज्य सरकार 6-6 हजार रुपये की राशि किसान सम्मन निधि के रूप में दे रही है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की बड़ी घोषणा

इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ यादव ने ग्राम दीपनाखेड़ा से करीला धाम तक 10 किलोमीटर की सड़क की स्वीकृत किए जाने की घोषणा की। उन्होंने कलेक्टर को निर्देश दिए कि करीला धाम तीर्थ के लिए कार्य योजना बनाई जाए। बता दें, इससे पहले उन्होंने करीला धाम पहुंचकर माता जानकी के दर्शन किए। यहां उन्होंने प्रदेश वासियों के सुख-समृद्धि की कामना की। पूजा-पाठ के बाद उन्होंने श्रद्धालुओं के साथ खेली फूलों की होली भी खेली।

इस दौरान उन्होंने कहा कि करीला धाम में आस्था के साथ पूर्ण श्रद्धा भाव से श्रद्धालु माता जानकी के दर्शन करने आते हैं। माता जानकी श्रद्धालुओं की मनोकामना पूर्ण करती हैं। उन्होंने कहा कि आज का दिन अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर माता जानकी के दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त किया है। माता सीता शक्ति पराक्रम की देवी है, माता सीता का प्रताप गौरवशाली संस्कृति है। इस पवित्र स्थान से महर्षि वाल्मीकि, सीता माता एवं लव कुश की कहानी जुड़ती है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक काल में अलग-अलग देवताओं का महत्व रहा है। हमारी भारतीय संस्कृति में मातृशक्ति को प्रथम स्थान दिया गया है।

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