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बेमेतरा , संवाददाता : गिधवा-परसदा पक्षी विहार में सर्दियों के साथ विदेशी प्रवासी पक्षियों का आगमन तेज हो गया है। जलाशय में मैलार्ड बत्तख और साइबेरियन स्टोनचैट दिखाई दिए हैं। पक्षी प्रेमियों ने क्षेत्र को पक्षी अभयारण्य घोषित करने की मांग की है।

छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के नवागढ़ ब्लॉक में स्थित प्रसिद्ध गिधवा-परसदा पक्षी विहार में सर्दियां शुरू होते ही विदेशी प्रवासी पक्षियों का आगमन काफी तेज हो गया है। गिधवा जलाशय में मैलार्ड बत्तख का जोड़ा दिखाई देने के बाद अब साइबेरिया से हजारों किलोमीटर की दूरी तय करके पहुंची छोटी चिड़िया साइबेरियन स्टोनचैट (काला पिद्दा) भी नजर आई है। पक्षी विशेषज्ञों के अनुसार, लगभग सभी प्रवासी पक्षी अब इस पक्षी विहार में पहुंच चुके हैं। इस वजह से पूरे क्षेत्र के पक्षी प्रेमियों और बर्ड वॉचर्स के बीच काफी उत्साह देखा जा रहा है।

आवाज दो पत्थरों के टकराने जैसी
मैलार्ड बत्तख उत्तरी अमेरिका, यूरोप और साइबेरिया जैसे ठंडे क्षेत्रों से सर्दियां बिताने के लिए भारत आती है। अपने हरे चमकदार सिर, पीली चोंच और भूरे रंग के सीने के कारण यह पक्षी हमेशा आकर्षण का केंद्र बनी रहती है। दूसरी ओर, साइबेरिया, मध्य एशिया और यूरोप से लंबी दूरी तय कर आने वाली साइबेरियन स्टोनचैट अपनी विशिष्ट शारीरिक बनावट और स्वभाव के लिए पहचानी जाती है। पक्षी विशेषज्ञों के अनुसार, हाल ही में दिखाई देने वाला साइबेरियन स्टोनचैट नर पक्षी है। इसकी पहचान इसके काले सिर, गर्दन पर मौजूद सफेद कॉलर और गहरी नारंगी-भूरी छाती से की जाती है। इस पक्षी की आवाज दो पत्थरों के टकराने जैसी सुनाई देती है।

फसलों के लिए लाभदायक और अनोखा व्यवहार

स्थानीय बर्ड गाइडों के अनुसार, साइबेरियन स्टोनचैट अक्सर बिजली के तारों, पेड़ों की डालियों और झाड़ियों की ऊंची जगहों पर बैठती है। वहां बैठकर यह उड़ने वाले कीड़ों को पकड़ती है और कीड़ा शिकार करने के बाद फिर से उसी स्थान पर आकर बैठ जाती है। फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों को खाकर यह चिड़िया प्राकृतिक रूप से उनके नियंत्रण में महत्वपूर्ण मदद प्रदान करती है।