अलीगढ,संवाददाता : एसटीएफ को इनके कंप्यूटरों में जन्म, मृत्यु व निवास प्रमाण पत्र बनाने वाला पोर्टल मिला है। जिसके जरिये वे 50 से 100 रुपये ऑनलाइन सरकारी खाते में जमा कर प्रमाण पत्र बनाते थे। जिसके बदले 1 हजार रुपये ऑनलाइन ग्राहक से लेते थे। सरकारी साइटों को हैककर आधार कार्ड बनाने वाला गिरोह एक साल से सक्रिय है। मगर एसटीएफ स्तर से हुई अब तक की जांच में उजागर हुआ है कि इस गिरोह ने छह माह में दो हजार से अधिक फर्जी आधार कार्ड बना दिए। साथ में इतने ही अन्य प्रमाण पत्र बनाए। ये ऐसे लोगों को खोजते थे जो डाकघरों की लाइनों में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते थे। सीओ तृतीय सर्वम सिंह के अनुसार साजिद व नईमुद्दीन पड़ोसी हैं। चूंकि साजिद पहले से इस काम में लगा था। इसलिए उसने ही नईमुद्दीन को अपने साथ शामिल किया। दोनों ने मिलकर यह धंधा शुरू किया। इसके लिए उन्होंने मोहल्ले में ही अपने एजेंट बनाए। वे लोग शहर के अलग अलग इलाकों में डॉकघरों में जाकर ऐसे ग्राहक खोजते थे, जिनके आधार कार्ड नहीं बन रहे थे या उनके आधार कार्ड किन्हीं कमियों के कारण अपडेट नहीं हो पा रहे थे। छह माह पहले इनका धंधा गति पकड़ गया। इसके बाद से इन्होंने यह काम तेजी से शुरू कर दिया। बरामद आधार कार्ड भी ग्राहकों के थे, जो बनकर रखे हुए थे। बड़ी संख्या में बाहरियों के आधार कार्ड बनने का भी अंदेशा जीवनगढ़ व उससे सटा इलाका नवविकसित है। दोनों हैकर इसी इलाके में सक्रिय थे। इस नवविकसित इलाके में अपने जिले के साथ-साथ आसपास के तमाम जिलों व दूसरे राज्यों के लोगों का बसना भी जारी है। पिछले कुछ वर्षों में इस इलाके में आबादी काफी तेजी से बढ़ी है। अब जांच टीम व एसटीएफ का अंदेशा है कि इनके द्वारा बड़ी संख्या में यहां आकर बसे बाहरियों के आधार कार्ड तो नहीं बनाए गए। इस सवाल का जवाब जांच के आधार पर मिलेगा। गुजरात-पश्चिम बंगाल के ऑपरेटरों के सहयोग से शुरू हुआ गोरखधंधा पुलिस पूछताछ में दोनों ने स्वीकारा कि एक वर्ष पहले साजिद की मुलाकात उसके साथ जॉब करने वाले गुजरात के साथी प्रशांत व पश्चिम बंगाल के साथी नोमान, मुजीबुर व अमीन से हुई। प्रशांत वर्तमान में गुजरात राज्य के आधार कार्ड बनाने वाली अधिकृत एजेंसी का ऑपरेटर है, जबकि नोमान, मुजीबुर व अमीन ने पूर्व में यह काम किया है। उन्होंने साजिद की बात आकाश से कराई। इसके बाद आकाश ने अपने बंदे साजिद के पास भेजे। फिर इनका धंधा चल पड़ा।ऐसे चल रहा था कामएसटीएफ को इनके कंप्यूटरों में जन्म, मृत्यु व निवास प्रमाण पत्र बनाने वाला पोर्टल मिला है। जिसके जरिये वे 50 से 100 रुपये ऑनलाइन सरकारी खाते में जमा कर प्रमाण पत्र बनाते थे। जिसके बदले 1 हजार रुपये ऑनलाइन ग्राहक से लेते थे। इसके अलावा आधार कार्ड का पोर्टल इंस्टाल मिला। इसे वे एनीडेस्क के जरिये आकाश के सहयोग से संचालित करते थे। आकाश उनके सिस्टम में उत्तराखंड व झारखंड की डिपार्टमेंट ऑफ वीमेंस एंड चाइल्ड वेलफेयर की साइट का पोर्टल अपडेट कर उसमें ग्राहक का डेटा फीड कराता था। जिसमें नाम, नंबर, पता व प्रमाण पत्र जरूरी होता था। उसके अपलोड होने पर आधार कार्ड बनाकर भेजता था। इसके लिए इन साइटों के पोर्टलों पर इन्होंने अपने आईडी-पासवर्ड भी डाल रखे थे। उसी के जरिये ये ग्राहकों के फिंगर व आई थंब लेकर अपलोड करते थे। पार्षद सहित इनकी मोहरें मिलीं फर्जी जन्म व मूल निवास प्रमाण पत्र बनाने के लिए इनके पास से संतोष कुमार गर्ग नोटरी अधिवक्ता, हेड मास्टर ब्लू हिल्स पब्लिक स्कूल राज विहार कालोनी अलीगढ़, महिला आरोग्य समिति अध्यक्ष-सचिव, रहीसुद्दीन पार्षद वार्ड 47 रजा नगर, जनस्वास्थ्य केंद्र सराय हकीम की मोहर भी मिली हैं। जिनसे खुद ही फर्जी प्रमाण पत्र बनाते थे। उसी के जरिये आधार कार्ड बन पाता था। यूपीआई व बैंक खातों में लेनदेनपूछताछ में दोनों ने स्वीकारा कि वे ग्राहकों से यूपीआई खातों में रुपये लेते थे। वहीं आकाश व उसके साथियों के खातों में बैंक ऑफ बड़ौदा, एसबीआई, कोटक महिंद्रा आदि खातों में रुपये भेजते थे। साथ में ग्राहकों व आकाश से बात करने के लिए उन्होंने अलग अलग नंबर ले रखे थे। Post navigation शटडाउन के चलते न्यूयॉर्क-शिकागो समेत 40 हवाई अड्डों पर उड़ानें होंगी बंद Jhanasi : मां पीतांबरा का भव्य बनेगा मंदिर…