चंबल में अवैध खनन पर राजस्थान और MP सरकार को SC कोर्ट ने लगाई फटकार

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नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क : सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में अवैध रेत खनन से जलीय जीवों के अस्तित्व को संकट उत्पन्न होने के मामले में गुरुवार को सख्त रुख दिखाया। कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा बिना नंबर के वाहन अवैध खनन में कैसे लगे हैं। राजस्थान सरकार को अवैध खनन रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाने पर कड़ी और मध्य प्रदेश सरकार को बिना पंजीकरण वाहनों के संचालन पर कड़ी फटकार लगाई।

दोनों राज्यों के अधिकारियों को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने और शपथ पत्र दाखिल करने का आदेश दिया। मामले में अगली सुनवाई 20 मई को होगी। इस बार मामले में एनएचएआइ को भी प्रतिवादी बना लिया गया है, क्योंकि अवैध खनन से उसके पुल को खतरा बताया गया है।

धौलपुर, मुरैना और आगरा क्षेत्र का किया था निरीक्षण

सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में अवैध खनन का स्वत: संज्ञान लेते हुए 13 मार्च को वाद दर्ज किया था। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश सरकार को 20 मार्च को नोटिस जारी करते हुए सेंट्रल इम्पावर्ड कमेटी (सीईसी) को सहायता करने के लिए अधिकृत किया था। सीईसी के सदस्य सीपी गोयल ने 30 अप्रैल से दो मई तक तीन राज्यों में फैले चंबल अभयारण्य के धौलपुर, मुरैना और आगरा क्षेत्र का निरीक्षण किया था।

सीईसी ने सात मई को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल रिपोर्ट में धौलपुर व मुरैना में अवैध खनन के साक्ष्य मिलने

सीईसी ने सात मई को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल रिपोर्ट में धौलपुर व मुरैना में अवैध खनन के साक्ष्य मिलने और अपंजीकृत वाहनों से रेत का खनन होने की बात कही थी। उप्र सीमा में टीम को खनन के साक्ष्य नहीं मिले थे।

सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, संदीप मेहता, विजय बिश्नोई की खंडपीठ ने गुरुवार को सुनवाई करते हुए राजस्थान के धौलपुर में अवैध खनन पर अधिकारियों को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए। 

अवैध खनन रोकने को क्या कदम उठाए

सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई के दौरान दोनों राज्यों के अधिकारियों को शपथ पत्र दाखिल कर बताना होगा कि कोर्ट द्वारा दो और 17 अप्रैल को जारी आदेश के अनुपालन में अवैध खनन रोकने को क्या कदम उठाए। कोर्ट के आदेश का अनुपालन करने की समय सीमा भी स्पष्ट करनी होगी। 

मुरैना में अपंजीकृत वाहनों की संलिप्तता पर उठाए सवाल

सीईसी ने रिपोर्ट में बताया था कि मप्र के मुरैना में खनन में अपंजीकृत वाहन संलिप्त हैं। पंजीकरण नंबर न होने के कारण माफिया का पता नहीं चलता और चालकों पर कार्रवाई सीमित रह जाती है। कोर्ट ने सरकार को फटकार लगाते हुए प्रमुख सचिव परिवहन को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए। उन्हें शपथ पत्र दाखिल कर बताना होगा कि अवैध खनन रोकने के लिए क्या कदम उठाए। दोषी अधिकारियों और उल्लंघनकर्ताओं के विरुद्ध अब तक क्या कार्रवाई की और भविष्य की क्या योजना है।

एनएचएआइ को भी बनाया प्रतिवादी

सीईसी ने उप्र और मप्र को जोड़ने वाले चंबल नदी पर बने पुल के खंभों के पास खनन माफिया द्वारा किए गए खनन से गड्ढे होने की बात रिपोर्ट में कही थी। इस पर कोर्ट ने बाद में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) को प्रतिवादी बनाने का आदेश किया। एनएचएआइ को शपथ पत्र दाखिल कर चंबल पर बने पुल की संरचनात्मक अखंडता और सुरक्षा के लिए बनाई गई योजना की जानकारी देनी होगी।

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