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फतेहपुर, संवाददाता : डेढ़ माह पहले धाता के सेमरी से पकड़े गए सूरजभान से रामनारायण का सुराग मिला। वर्ष 2005 से सीबीआई को तलाश थी। 

प्रयागराज में शंकरगढ़ थाना क्षेत्र के स्थित ऐतिहासिक गढ़वा किले (एक संरक्षित पुरातात्विक स्थल) में वर्ष 2002 में चौकीदार की हत्या और मंदिर से मूर्ति लूट के मामले में पुलिस की गिरफ्त से दूर चल रहे रामनारायण को सीबीआई की दिल्ली टीम ने शनिवार को नसीरपुर गांव से गिरफ्तार कर लिया। इससे करीब डेढ़ माह पहले इसी मामले में धाता के सेमरी गांव से सूरजभान को गिरफ्तार किया गया था।

दोनों के खिलाफ विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रदूषण/सीबीआई) लखनऊ की अदालत ने 2005 में पेशी पर हाजिर न होने के कारण गैरजमानती वारंट जारी किया था। गलत पता दर्शाने के कारण टीम इन तक नहीं पहुंच पा रही थी। गढ़वा किले के मंदिर से 22 अप्रैल 2002 को सोने की मूर्ति और 5,300 रुपये की लूट हुई थी। वारदात के दौरान चौकीदार विनोद कुमार श्रीवास्तव की हत्या कर दी गई थी। विवेचना सीबीआई को सौंपी गई थी। जमानत पर छूटने के बाद दोनों आरोपी कोर्ट में पेश नहीं हुए। इस पर कोर्ट ने गैरजमानती वारंट जारी कर सीबीआई को उन्हें गिरफ्तार कर पेश करने के निर्देश दिए थे।

करीब डेढ़ माह पहले सेमरी गांव के सूरजभान की गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में नसीरपुर निवासी रामनारायण निषाद का सुराग मिला। वारदात के बाद सूरजभान ने पता कौशाम्बी जिले के महेवाघाट का बताया था। वहीं रामनारायण ने खखरेरू के बजाय अपना थाना किशनपुर दर्शाया था। इसी गलत पते के कारण दोनों लंबे समय तक गिरफ्तारी से बचते रहे।

सीबीआई ने तीन माह पहले गिरोह के एक गुर्गे को चित्रकूट के राजापुर से पकड़ा था

सीबीआई ने तीन माह पहले गिरोह के एक गुर्गे को चित्रकूट के राजापुर से पकड़ा था। उसकी निशानदेही पर पहले सूरजभान और फिर शनिवार को रामनारायण गिरफ्तार हुआ। प्रभारी थानाध्यक्ष श्याम सुंदर गिरी ने बताया कि हत्या, लूट और चोरी के मामले में वांछित रामनारायण को दिल्ली सीबीआई के निरीक्षक योगेश कुमार ने गिरफ्तार किया है। लखनऊ सीबीआई कोर्ट में आरोपी को पेश किया गया है।

सीबीआई की आहट पर रामनारायण का थाने में सरेंडर
सीबीआई की टीम करीब पांच दिन से गांव में डेरा डाले थी। टीम अलग-अलग बहाने से रामनारायण के घर पहुंचकर उसके बारे में जानकारी जुटा रही थी। इस बीच रामनारायण जंगल में छिपा हुआ था। शनिवार को टीम ने राजस्व कर्मी बनकर भूमि पैमाइश का झांसा दिया। इस पर पर वह गांव लौट आया। टीम ने उसे पकड़ लिया लेकिन ग्रामीणों ने विरोध कर उसे छुड़ा लिया और सीधे थाने ले जाकर सरेंडर करा दिया। परिजन ने एनकाउंटर की आशंका जताई। इसके बाद पुलिस ने सीएचसी में मेडिकल परीक्षण कराने के बाद उसे सीबीआई के सुपुर्द कर दिया।

एनकाउंटर में मारे गए रामनारायण को डकैती में वांछित बता रही पत्नी
रामनारायण निषाद के खिलाफ 2005 में सीबीआई ने नोटिस जारी किया था। नोटिस का जवाब देने उसकी पत्नी चुनकी सीबीआई के पास गई थी। 22 मई 2005 को दिए लिखित जवाब में उसने पति को निर्दोष बताते हुए कहा था कि गांव में रामनारायण नाम का एक अन्य व्यक्ति भी था जिसके पिता नाम शिवगोपाल था जबकि उसके पति के पिता का नाम शंकर है। चुनकी का कहना है कि शिवगोपाल का पुत्र रामनारायण वर्ष 2005 में पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था और उसी को डकैती के मामले का आरोपी माना गया। उसके पास उस रामनारायण की पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी होने का दावा है।

फरारी के दौरान मछली शिकार में पकड़ा गया था रामनारायण


सीबीआई की गिरफ्त से 21 साल तक दूर रहे रामनारायण को खखरेरू पुलिस ने 2007 और 2008 में मछली शिकार के मामलों में पकड़ा था लेकिन वह कोर्ट से बरी हो गया। गलत पता दर्ज होने के कारण संबंधित थाने तक कभी वारंट नहीं पहुंचा और वह गिरफ्तारी से बचता रहा। रामनारायण कई वर्ष लुधियाना में भी रहा। उसका बड़ा बेटा रामसेवक लुधियाना में रहता है। छोटा बेटा राज और बेटी अशोकिया गांव में रहते हैं। गांव में वह भट्ठे पर मजदूरी करता था।

यमुना कटरी के डकैत गिरोह का सदस्य था रामनारायण
सीबीआई के हत्थे चढ़े नसीरपुर के रामनारायण और सेमरी के सूरजभान को यमुना कटरी के चर्चित उमर केवट डकैत गिरोह का सदस्य बताया जाता है। सूरजभान का बड़ा भाई पूनी हिस्ट्रीशीटर है। चाचा पुरुषोत्तम की करीब 15 वर्ष पहले उमर गिरोह के साथ हुई पुलिस मुठभेड़ में कौशाम्बी के महेवाघाट में मौत हो गई थी। गढ़वा किले की इस डकैती में रामनारायण निषाद और सूरजभान के अलावा क्षेत्र के तीन अन्य लोग भी शामिल थे। मामले में विजय शुक्ला, छोटे पासी, मोहम्मद सलीम, प्रेम, जमुना प्रसाद, भगत, छोटेलाल पुत्र कन्हैया, छोटेलाल पुत्र रामधनी, शंकर और धनराज उर्फ रामप्रकाश समेत करीब 10 आरोपी नामजद थे।

सीबीआई की टीम ने थाने में जानकारी दी थी। टीम के साथ स्थानीय पुलिस को भेजा गया था। आरोपी को जानकारी होने पर वह भाग निकला लेकिन उसे गांव से ही पकड़ लिया गया। पूछताछ के बाद आरोपी को सीबीआई के सुपुर्द कर दिया गया है। – अभिमन्यु मांगलिक, एसपी फतेहपुर