पीलीभीत, संवाददाता : बृहस्पतिवार को बूंदीभूड़ गांव में शराब दुकान खोलने पर विवाद हिंसक हुआ। महिलाओं ने बोतलें तोड़ी, पथराव व लाठीचार्ज हुआ। प्रशासनिक टीम व ग्रामीण घायल हुए।
कलीनगर तहसील क्षेत्र के सीमावर्ती गांव बूंदीभूड़ में शराब दुकान खोले जाने को लेकर चल रहा विवाद बृहस्पतिवार को हिंसक हो गया। गांव में हालात का जायजा लेने पहुंची प्रशासनिक, आबकारी और पुलिस टीम की मौजूदगी में महिलाओं का आक्रोश फूट पड़ा। इस दौरान हुए बवाल में शराब की बोतलें दुकान के बाहर फेंककर तोड़ी गईं, जिसके बाद स्थिति बेकाबू हो गई। जमकर पथराव हुआ। लाठीचार्ज भी हुआ। दोनों तरफ से लाठी-डंडे चले। तहसीलदार और चौकी इंचार्ज समेत कई लोग घायल हो गए। ग्रामीण पक्ष की छह महिलाएं भी घायल हुई हैं। बवाल में तीन वाहन भी क्षतिग्रस्त हो गए।
ग्राम पंचायत बूंदीभूड़ में शासन की ओर से शराब की दुकान आवंटित की गई थी। ग्रामीण इसका विरोध कर रहे थे। बुधवार से दुकान का संचालन शुरू होने के बाद महिलाओं का आक्रोश और बढ़ गया। बृहस्पतिवार को बड़ी संख्या में महिलाएं दुकान बंद कराने की मांग को लेकर एकत्र हो गईं। सूचना मिलने पर एसडीएम प्रमेश कुमार, तहसीलदार वीरेंद्र कुमार, सीओ प्रतीक दहिया, इंस्पेक्टर अशोक पाल सिंह, आबकारी विभाग की टीम और पुलिस बल मौके पर पहुंचा।
अधिकारियों ने महिलाओं को समझाने का प्रयास किया और नियमों की जानकारी दी
अधिकारियों ने महिलाओं को समझाने का प्रयास किया और नियमों की जानकारी दी। बढ़ते तनाव को देखते हुए दुकान बंद कराने की बात भी कही, लेकिन महिलाएं नहीं मानीं। इसी दौरान कुछ महिलाएं दुकान के भीतर घुस गईं और शराब की बोतलें बाहर निकालकर लाठी-डंडों से तोड़ना शुरू कर दिया। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस और प्रशासनिक टीम ने सख्ती दिखाई। इसके बाद माहौल बिगड़ गया।
महिलाओं ने किया हमला
आरोप है कि महिलाओं की ओर से पथराव और लाठी-डंडों से हमला किया गया। वहीं ग्रामीणों ने पुलिस द्वारा लाठीचार्ज करने का आरोप लगाया गया। झड़प में तहसीलदार वीरेंद्र कुमार का हाथ टूट गया, जबकि कलीनगर चौकी इंचार्ज सैफ अली के पैर में फ्रैक्चर हुआ है। अन्य पुलिसकर्मी और फोर्स को लेकर गई प्राइवेट बस का चालक परवेज भी घायल हुआ। ग्रामीण पक्ष की छह महिलाओं के घायल होने की भी सूचना है। घायल तहसीलदार और चौकी इंचार्ज को जिला अस्पताल रेफर किया गया, जबकि अन्य घायलों का उपचार माधोटांडा सीएचसी में कराया है।
एसडीएम प्रमेश कुमार ने बताया कि महिलाओं को शांतिपूर्वक समझाने का प्रयास किया गया था, लेकिन वे नहीं मानीं
एसडीएम प्रमेश कुमार ने बताया कि महिलाओं को शांतिपूर्वक समझाने का प्रयास किया गया था, लेकिन वे नहीं मानीं। वहीं माधोटांडा इंस्पेक्टर अशोक पाल सिंह ने बताया कि मामले में आबकारी विभाग की ओर से रिपोर्ट दर्ज कराई जा रही है और आगे की कार्रवाई की जा रही है।
घटना के वीडियो हुए वायरल
घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हुए, इनमें महिलाओं का आक्रोश और मौके पर मची अफरा-तफरी साफ दिखाई दे रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन पहले ही गंभीरता दिखाता और महिलाओं की आपत्तियों पर समय रहते निर्णय लेता तो हालात यहां तक नहीं पहुंचते।
भगदड़ के बीच अफसरों को गांव से बाहर निकलना पड़ा भारी
महिलाओं और पुलिस-प्रशासनिक अफसरों के बीच हुई झड़प के बाद स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई। महिलाएं भी उग्र हो गईं। अन्य ग्रामीण भी एकत्र होने लगे। स्थिति को देख अफसरों समेत अन्य कर्मियों में भी भगदड़ मच गई। जैसे-तैसे अधिकारी व कर्मी वाहनों को लेकर गांव से सुरक्षित डैम क्षेत्र में पहुंचे। अतिरिक्त फोर्स को मौके पर बुलाया गया। करीब एक घंटे बाद टीम वहां से लौटी।
