बीजापुर, संवाददाता : घने जंगल, दुर्गम रास्ते और माओवादी विरोधी अभियान की चुनौती-इन्हीं हालातों के बीच स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) जवानों ने मानवता की ऐसी मिसाल पेश की, जिसने वर्दी के भीतर धड़कते संवेदनशील दिल को उजागर कर दिया। दंतेवाड़ा जिले के अंदरूनी क्षेत्र में सर्चिंग पर निकली एसटीएफ टीम ने आग से गंभीर रूप से झुलसी एक ग्रामीण महिला को समय पर उपचार दिलाकर उसकी जान बचाई।
एसटीएफ कमांडर ओम प्रकाश सेन के नेतृत्व में टीम जब ग्राम पुरंगेल पहुंची, तो वहां एक महिला दर्द से कराहती मिली। जानकारी मिली कि 10–15 दिन पहले आग तापते समय वह दुर्घटनावश आग में गिर गई थी, जिससे उसकी कमर से ऊपर का हिस्सा बुरी तरह झुलस गया। इलाज के अभाव में घाव सड़ने लगे थे और स्थिति बेहद नाजुक हो चुकी थी।
महिला की हालत देखकर जवानों ने पल भर की भी देरी नहीं की
महिला की हालत देखकर जवानों ने पल भर की भी देरी नहीं की। मानवीय संवेदना दिखाते हुए पहले परिवार को राशन और आर्थिक मदद दी गई, फिर रेस्क्यू का फैसला लिया गया। दुर्गम जंगल और पगडंडियों में वाहन संभव नहीं था, ऐसे में जवानों ने चारपाई को कांवड़ बनाकर महिला को कंधों पर उठाया।
कई किलोमीटर पैदल चलकर हिरोली गांव तक लाए। वहां पहले से मंगाई गई एंबुलेंस से उसे किरंदुल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां से प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल दंतेवाड़ा रेफर किया गया।
चिकित्सकों के अनुसार महिला करीब 40–50 प्रतिशत तक झुलसी हुई है और देर से इलाज मिलने के कारण संक्रमण भी फैल गया था। इसके बावजूद समय पर रेस्क्यू होने से उसकी जान बच सकी।
खास बात यह है कि घायल महिला का तीन माह का एक मासूम बेटा भी है। एसटीएफ ने अस्पताल प्रशासन से समन्वय कर मां और बच्चे-दोनों के समुचित इलाज और देखभाल की व्यवस्था सुनिश्चित की।
