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 जगदलपुर, डिजिटल डेस्क : इंद्रावती टाइगर रिजर्व (आईटीआर) में करोड़ों रुपये की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ खड़े हुए हैं। महाराष्ट्र पुलिस के दो लोगों को कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर में दो बाघों की खाल के साथ गिरफ्तार किया गया।

पूछताछ में उन्होंने बताया कि इन बाघों का शिकार बीजापुर जिले के पासेवाड़ा स्थित आइटीआर के कोर क्षेत्र में किया गया था। हालांकि, प्रारंभिक जांच में वन विभाग के रिकार्ड में इन बाघों का कोई उल्लेख नहीं मिला।

यह दर्शाता है कि जिन बाघों का शिकार हुआ, वे विभाग की निगरानी प्रणाली में दर्ज नहीं थे।यह पहला मामला नहीं है। पिछले एक दशक में बस्तर में बाघ की खाल तस्करी के 10 मामले सामने आ चुके हैं।

इसके बावजूद, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की वार्षिक कार्ययोजना के तहत आईटीआर में निगरानी गतिविधियों पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। वर्तमान में आठ वर्ष बाद पहली बार कैमरा ट्रैप के जरिए बाघों की गणना चल रही है।

वर्ष 2018 की गणना में इंद्रावती में छह बाघ होने का दावा किया गया था, लेकिन उसके बाद चार बाघों की खाल बरामद हो चुकी हैं। इस राजफाश ने बाघों की वास्तविक संख्या और निगरानी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

वर्ष 2024-25 में 1.35 करोड़ और 2025-26 में 6.46 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं, यानी दो वर्षों में करीब आठ करोड़ रुपये का प्रविधान हुआ। इसके बावजूद, दोनों बाघ विभाग की निगरानी प्रणाली से बाहर थे। वन विभाग ने अब डीएनए और फोरेंसिक जांच शुरू कर दी है।

अब कितने बचे बाघ, यह सवाल?

वर्ष 2014 की गणना में प्रदेश में 46 बाघ होने का दावा किया गया था, जो 2018 में घटकर 19 रह गया। यदि आंकड़े सही हैं, तो इंद्रावती टाइगर रिजर्व में अब केवल दो बाघ बचे हैं। वन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, प्रदेश गठन के बाद एक भी शिकारी को न्यायालय से सजा नहीं मिल सकी है, जिससे वन्यजीव अपराधों की प्रभावी रोकथाम में बाधा उत्पन्न हो रही है।

लंबे समय तक माओवादी गतिविधियों के कारण इंद्रावती टाइगर रिजर्व के बड़े हिस्से तक वन विभाग की नियमित पहुंच नहीं हो पाई। इसी वजह से बाघों की व्यापक गणना भी नहीं हो सकी। -सुदीप बलगा, निदेशक, इंद्रावती टाइगर रिजर्व

इंद्रावती में बाघ संरक्षण की कहानी

1983 में इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान को टाइगर रिजर्व का दर्जा मिला।

2017 में आइटीआर में 06 बाघ होने का दावा

2022 में गणना नहीं होने से वास्तविक आंकड़ें ज्ञात नहीं

2025-26 में एनटीसीए कर रही बाघों की गणना