वाशिंगटन,डिजिटल डेस्क : भारतीय मूल की सिटी काउंसिल सदस्य नित्या रमन ने लॉस एंजिल्स का मेयर चुनाव जीत लिया है। नित्या रमन ने इस इलेक्शन में मौजूदा मेयर करेन बास को हराया। नित्या रमन जो कुछ हफ्ते पहले तक सार्वजनिक रूप से करेन बास का समर्थन कर रही थीं, अब उन्होंने ही चुनाव में मौजूदा मेयर को मात दी है। रमन, जो 2020 में पहली बार लॉस एंजिल्स सिटी काउंसिल के लिए चुनी गई थीं, फरवरी में मेयर पद की दौड़ में शामिल हुईं। कौन हैं नित्या रमन? 1981 में केरल में जन्मीं नित्या रमन छह साल की उम्र में ही अमेरिका चली गई थीं और 22 साल की उम्र में वह अमेरिकी नागरिक बन गईं। नित्या ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से अपनी स्नातक की पढ़ाई पूरी की और फिर मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) से अर्बन प्लानिंग (शहरी नियोजन) में मास्टर डिग्री हासिल की। चुनावी राजनीति में आने से पहले, रमन ने ‘ट्रांसपेरेंट चेन्नई’ (Transparent Chennai) की स्थापना की, जो शहरी शोध से जुड़ी एक संस्था है और साफ-सफाई तथा नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने पर काम करती है। 2013 में लॉस एंजिल्स आने के बाद, उन्होंने शहर के म्युनिसिपल एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर के साथ काम किया, ‘सेलाह नेबरहुड होमलेस कोएलिशन’ बनाने में मदद की और ‘टाइम्स अप एंटरटेनमेंट’ की कार्यकारी निदेशक के रूप में काम किया। लॉस एंजिल्स की मेयर बनेंगी भारतवंशी नित्या रमन लॉस एंजिल्स के मेयर इलेक्शन में दोनों उम्मीदवारों ने सार्वजनिक सुरक्षा, किफायती आवास और बेघर लोगों की समस्या को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोण पेश किए। यह मुकाबला देखते ही देखते एक पीढ़ीगत और राजनीतिक लड़ाई में बदल गया। करेन बास को शहर के बड़े राजनीतिक धड़ों का समर्थन मिला, जिसमें ‘लॉस एंजिल्स काउंटी फेडरेशन ऑफ लेबर’ और काउंटी की डेमोक्रेटिक पार्टी शामिल थीं। वहीं, नित्या रमन को उन समूहों का समर्थन मिला, जिन्होंने हाल के वर्षों में सिटी हॉल में अपनी पहचान बनाई है। इनमें वामपंथी विचारधारा वाला समूह ‘डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट्स ऑफ अमेरिका’ और परिवहन के लिए काम करने वाला समूह ‘स्ट्रीट्स फॉर ऑल’ शामिल हैं। चुनाव के आखिरी दिनों में दोनों उम्मीदवारों ने प्रचार की बिल्कुल अलग-अलग रणनीतियां अपनाईं। बास ने बुजुर्ग मतदाताओं पर ध्यान केंद्रित किया। वह वेस्ट एडम्स और नॉर्थरिज के सीनियर सेंटर्स में गईं, जहां उन्होंने वहां रहने वाले बुजुर्गों के साथ डांस भी किया। दूसरी ओर, रमन ने बार, नाइटक्लब और कॉलेज परिसरों में जाकर प्रचार किया और सिटी हॉल में बदलाव की वकालत की। Post navigation यूपी की खो-खो और कबड्डी टीम का चयन बंगाल STF की बड़ी कार्रवाई, अवैध हथियारों का जखीरा बरामद, 4 गिरफ्तार