कानपुर देहात , संवाददाता :Kanpur Dehat News: कन्नौज में धर्मांतरण गिरोह का भंडाफोड़ होने के बाद पुलिस ने अपनी लिखा-पढ़ी में चूक कर दी थी। इस बार पुलिस ने धर्मांतरण के मकड़जाल से निकलने के प्रयास में जुटे निबौली निवासी रामभरोसे की शिकायत पर गंभीरता दिखाई। पीड़ित ने पुलिस को आरोपियों की मदद के नाम पर प्रलोभन देने से लेकर धर्मांतरण आदि कराने का चिट्ठा खोला।
कानपुर देहात में कोरोना महामारी ने लोगों को रोजगार से लेकर पेट भरने तक का संकट खड़ा कर दिया था। उस दौर में मिली तनिक सी मदद भी लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं थी। अकबरपुर थाना से एक किलोमीटर दूर पर बंद हुए एक स्कूल में व्यवसायिक प्रशिक्षण केंद्र शुरू करने वाले शातिरों ने पहले लोगों को उनके कौशल निखारने व मदद करने के नाम पर विश्वास जीता। साथ ही धर्मांतरण का मकड़जाल फैलाकर कानपुर देहात के अलावा कई स्थानों के लोगों का धर्मांतरण करवा दिया। कन्नौज जिले के धर्मांतरण के मामले में पन्नालाल की गिरफ्तारी के बाद पुलिस को कानपुर देहात से उसके तार जुड़े होने की जानकारी मिली।
एसपी श्रद्धा नरेंद्र पांडेय की ओर से एसआईटी का गठन कर जांच शुरू करवाई गई थी। शनिवार को नवाकांति का संचालन करने वाले डेनियल शरद सिंह, हरिओम त्यागी व सावित्री शर्मा को गिरफ्तार किया है। एसपी ने बताया कि नवाकांति सोसाइटी में पहले स्कूल का संचालन होता था। जोकि कोविड में बंद हो गया था। बाद में यहां व्यवसायिक प्रशिक्षण केंद्र का संचालन शुरू किया था। तीनों लोग सूक्ष्म व लघु स्तर पर अपना जाल फैला कर अनुसूचित जाति के लोगों व आर्थिक रूप कमजोर लोगों को फंसाते थे। आरोपी लोगों को सिलाई, कढ़ाई, बुनाई व अन्य तकनीकी कौशल प्रशिक्षण का प्रलोभन देकर अपने पास लाते थे।
अंतरजनपदीय व दूसरे प्रांतों से तार जुड़े होने की आशंका
साथ ही, लोगों को हैंडपंप सहित अन्य छोटी-छोटी जरूरत की चीजें देते थे। लोगों के जाल में फंसने पर बाइबिल रीडिंग से लेकर वेपटिस्म प्रक्रिया से शुद्धीकरण के बाद धर्मांतरण तक काम करते थे। इन लोगों ने जिले में करीब 50 हैंडपंप लगवाए हैं, जिनकी जांच की जा रही है। प्रत्येक हैंडपंप लगाने में करीब 50 हजार रुपये तक का खर्चा आता था। जांच के दौरान पुलिस को संस्था के भवन से कई कागजात मिले हैं। जिनकी गहन जांच की जा रही है। आरोपियों ने अभी तक कितने लोगों का धर्मांतरण करवाया है। इनके अंतरजनपदीय व दूसरे प्रांतों से तार जुड़े होने को लेकर जांच की जा रही है।
आयु वर्ग व स्तर के हिसाब से चलाते थे क्लब
पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने यह भी बताया कि वह लोग गांवों में रहने कम पढ़े लिखे लोगों, युवाओं, बच्चों व बुजुर्गों के हिसाब से क्लब बनाकर संचालन करते थे। इनमें इन लोगों के दो क्लब सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण रहते थे। जिसमें पहला क्लब गृह कलीसिया के नाम से संचालित होता था। जिसमें गांव स्तर पर ईसाई धर्म को अपना लेने वाला युवक अपने घर में अस्थाई रूप से चर्च का संचालन कर प्रार्थना सभा कर लोगों को गरीबी से मुक्ति दिलाने व ईसाई धर्म की खूबियां गिनाकर उन्हें प्रभावित करता था।
लोगों को झांसे में लेने के बाद उनका धर्म परिवर्तन करवाने का काम करते था। वहीं दूसरा समूह अवाना जोकि विशेष तौर पर बच्चों को धर्मांतरण करवाता था। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों के ओर से वीडियो बाइबिल रीडिंग स्कूल, वोकेशनल सेंटर, प्रौढ़ शिक्षा केंद्र, सिलाई प्रशिक्षण केंद्र आदि का संचालन किया गया। यहां तक कि धर्मांतरण के बाद जिले में ईसाई धर्म में सबसे परिपक्व हो जाने वाले व्यक्ति को जिला स्तर का पादरी आदि भी घोषित कर देते थे।
कन्नौज में हुई चूक से ली सीख, तत्परता से की कार्रवाई
कन्नौज में धर्मांतरण गिरोह का भंडाफोड़ होने के बाद पुलिस ने अपनी लिखा-पढ़ी में चूक कर दी थी। कन्नौज में हुई किरकरी से पुलिस ने धर्मांतरण के मकड़जाल से निकलने के प्रयास में जुटे निबौली निवासी रामभरोसे की शिकायत पर गंभीरता दिखाई। पीड़ित ने पुलिस को आरोपियों की मदद के नाम पर प्रलोभन देने से लेकर धर्मांतरण आदि कराने का चिट्ठा खोला, तो पुलिस ने भी लिखा-पढ़ी में पीड़ित की सुरक्षा व आरोपियों पर कार्रवाई करने में कसर नहीं छोड़ी।
पुलिस ने पीड़ित की तहरीर पर दर्ज की गई प्राथमिकी में उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 2021 की धारा 3/5(1)/5(2)/5(3) लगाई है। पुलिस अधिकारी के मुताबिक इस अधिनियम की धारा 3 किसी महिला, नाबालिग, अनुसूचित जाति के लोगों के साथ धोखाधड़ी कर धर्मांतरण कराने पर लगाई जाती है। इसमें करीब पांच साल की सजा हो सकती है। धारा 5(1) की जबरन धर्मांतरण को दर्शाती है। इसमें तीन साल तक की सजा का प्रावधान है। धारा 5(2) धर्मांतरण के लिए विदेशी फंडिंग को दर्शाती है। इसमें अधिकतम 14 साल की सजा व अर्थदंड का प्रावधान है।
