झांसी ,संवाददाता : दतिया स्थित मां पीतांबरा मंदिर नए रंग रूप में नजर आएगा। श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए मंदिर परिसर को और विस्तार दिया जा रहा है। काॅरिडोर के साथ मुख्य द्वार को भव्य बनाया जा रहा है। निकास के लिए भी द्वार होगा। यह सारा कार्य उदयपुर के सैंड स्टोन से होगा। इस काम पर दस करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। छह माह में कार्य पूरा हो जाएगा।
पीतांबरा पीठ पर मां के दर्शनों के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से हजारों लोग आते हैं। शनिवार को यह संख्या 40,000 तक पहुंच जाती है। मुख्य द्वार पर दर्शनार्थियों का जमावड़ा लग जाता है। अगर कोई वीआईपी आता है तो उसे निकालने के लिए अलग से इंतजाम करना पड़ता है। दर्शनार्थियों की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए पीठ के न्यास ने मंदिर का विस्तार कराने का निर्णय लिया है। पुराने मुख्य द्वार के बायीं ओर इतनी ही चौड़ाई का एक द्वार और बनाया जाएगा। यही नहीं, द्वार से लेकर प्राचीन कुएं तक करीब 90 फीट लंबा और 46 फीट चौड़ा भव्य गलियारा बनेगा, इसमें नक्कासीदार पिलर व मेहराब बनेंगी।
दिव्यांगजनों के लिए अलग से बनेगा रैंप
हर हफ्ते मंदिर में मां बगलामुखी देवी और मां धूमावती के दर्शनों के लिए जो लोग आते हैं उनमें सैकड़ों ऐसे भी होते हैं जो किसी न किसी तरह से शारीरिक विकृति से परेशान रहते हैं। बिना रैंप के मंदिर तक पहुंचने में उन्हें भारी परेशानी होती है। उनकी इस समस्या को देखते हुए मुख्य द्वार के बगल में ही रैंप बनाया जाएगा। ऐसे लोगों के लिए व्हीलचेयर का भी इंतजाम होगा।
बगलामुखी माई तक आने में होगी आसानी
कुछ साल पहले ही ट्रस्ट ने नया उत्तर द्वार बनवाया था। यहां से आकर भक्तों को आसानी से मां धूमावती के दर्शन हो जाते हैं। मुख्य द्वार के पास दूसरा द्वार बन जाने के बाद बगलामुखी माई की खिड़की तक आने में भी सहूलियत होगी। लोगों को ज्यादा देर तक कतारों में नहीं लगना पड़ेगा।
हर रोज 16 घंटे दर्शन होते हैं बगलामुखी देवी के
पीतांबरा पीठ पर देश के कोने-कोने से श्रद्धालु पहुंचते हैं। पीठ प्रबंधन ने जो इंतजाम किया है, उसके मुताबिक देवी बगलामुखी की खिड़की हर रोज सुबह 5:30 पर दर्शनों के लिए खुल जाती है और रात की बड़ी आरती के बाद बंद होती है। यानी करीब 16 घंटे दर्शन के लिए मिल जाते हैं।
दतिया श्री पीतांबरा पीठ के ट्रस्टी धीरेंद्र सिंह चंदेल ने बताया कि पीतांबरा पीठ की सिद्धि किसी से छिपी नहीं है। श्रद्धालुओं को मंदिर में प्रवेश से पहले अच्छा अनुभव हो, इसके लिए उदयपुर के पत्थर की मदद से निर्माण कराया जा रहा है। प्रवेश व निकास के लिए अलग-अलग द्वार भी होंगे।
