नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क : सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म उद्योग से जुड़े एक अहम मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष न्यायालय ने कहा कि फिल्म बनाना एक जोखिम भरा कारोबार है और हर फिल्म के सफल होने की गारंटी नहीं होती। इसी के साथ कोर्ट ने एक फिल्म निर्माता के खिलाफ दर्ज धोखाधड़ी के आपराधिक मामले को रद कर दिया।
जस्टिस पीएस नरसिम्हा और मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा कि किसी भी मामले में धोखाधड़ी साबित करने के लिए शुरुआत से ही धोखा देने की नीयत होना जरूरी है।
केवल यह कहना कि बाद में पैसा वापस नहीं किया गया, अपने आप में आपराधिक इरादा साबित नहीं करता। कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट के फैसले को पलटते हुए यह टिप्पणी की।
मामला फिल्म निर्माता वी गणेशन से जुड़ा है, जिन्होंने फिल्म बनाने के लिए एक व्यक्ति से पैसे लिए थे। समझौते के अनुसार, निवेशक को मुनाफे में हिस्सा देने की बात कही गई थी। बाद में और पैसा लिया गया और कुल निवेश पर हिस्सेदारी तय की गई।
फिल्म बनने और रिलीज होने के बाद भी निवेशक को पैसा नहीं मिला। निर्माता ने दो पोस्टडेटेड चेक दिए, लेकिन खाते में पर्याप्त रकम न होने के कारण वे बाउंस हो गए।
इसके बाद निवेशक ने धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर फिल्म नहीं चलती है, तो निवेशक को नुकसान हो सकता है और इसे आपराधिक मामला नहीं माना जा सकता।
