देवास, संवाददाता : नकली सोना गिरवी रखकर बैंक और ग्राहकों के साथ 2 करोड़ 22 लाख रुपये की धोखाधड़ी के मामले में सत्र न्यायालय, देवास ने सोमवार को फैसला सुनाया। बैंक एसबीएफसी फाइनेंस लि. (SBFC Finance Ltd.) के चार अधिकारियों को दोषी करार दिया। आरोपितों को 5-5 वर्ष के कारावास, जुर्माना एवं मुआवजे की सजा सुनाई है।
एडवोकेट उपेंद्र सिंह चंद्रावत ने बताया कि, अदालत में यह सिद्ध हुआ कि महेन्द्र पटेल (शाखा प्रबंधक), फाल्गुनी कश्यप (मुख्य मूल्यांकनकर्ता), शैलेन्द्र शर्मा (सेल्स मैनेजर) एवं प्रमोद चौधरी (सेल्स ऑफिसर) ने आपराधिक षड्यंत्र रचकर नकली सोने के आधार पर ऋण स्वीकृत किए और ग्राहकों को मोहरा बनाकर ऋण राशि स्वयं हड़प ली।
यह घटनाक्रम वर्ष 2018 से 2021 के बीच के दौरान हुआ था। जांच में सामने आया कि कई मामलों में नकली सोना स्वयं बैंक कर्मचारियों द्वारा उपलब्ध कराया गया, ऋण दस्तावेज ग्राहकों की अनुपस्थिति में तैयार किए गए तथा जाली हस्ताक्षर किए गए, जिसकी पुष्टि हस्तलेखन विशेषज्ञ की रिपोर्ट से हुई।
ग्राहकों को लोन बंद करने का झांसा दिया गया, लेकिन राशि जमा नहीं की गई। सत्र न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि यह अपराध सुनियोजित है और सार्वजनिक धन व बैंकिंग व्यवस्था में जनता के विश्वास को गंभीर क्षति पहुंचाने वाला है।
इसी आधार पर सजा दी गई। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी सख्त रुख अपनाते हुए आरोपितो की जमानत याचिका दो बार खारिज की थी तथा प्रकरण का निराकरण तय समय-सीमा में करने के आदेश दिए थे।
