World Water Day 2026: बड़वानी में नर्मदा नदी के जल और तट की रक्षक ये देवियां, प्रदूषण के राक्षस का कर रहीं संहार
बड़वानी, संवाददाता : World Water Day 2026 : चैत्र नवरात्र में जहां पूरा देश देवी शक्ति की आराधना में लीन है, वहीं बड़वानी की करीब 40 महिलाएं खुद देवी शक्ति का रूप लेकर मां नर्मदा की सेवा में जुटी हैं। ये महिलाएं न मंत्र पढ़ रही हैं, न हवन कर रही हैं – ये नदी के तट पर खड़े होकर प्रदूषण के राक्षस का संहार कर रही हैं। विश्व जल संरक्षण दिवस पर इनकी यह मुहिम पूरे प्रदेश के लिए मिसाल है।
रोहिणी सेवार्थ सामाजिक समिति के तत्वावधान में महिला मंडल का यह समूह पिछले दो साल से बड़वानी के प्राचीन रोहिणी तीर्थ राजघाट तट और आसपास के तटों पर अनवरत काम कर रहा है। अमावस्या, पूर्णिमा, नवरात्र और अन्य पर्वों पर यहां होने वाले दीपदान में प्लास्टिक डिस्पोजल को पूरी तरह प्रतिबंधित कराकर आटे के दीपों से दीपदान की परंपरा शुरू की गई है।
आटे का दीपक – एक तीर, दो निशाने
इस अनूठी पहल का दोहरा लाभ हो रहा है। एक तो आटे के दीपक नदी को प्रदूषित नहीं करते, वहीं मछली, कछुए सहित अन्य जलीय जीवों को इनसे पोषण मिलता है। यानी श्रद्धा भी, पर्यावरण रक्षा भी और जलचरों की सेवा भी – एक साथ।
समिति के पंडित सचिन शुक्ला और संजय पुरोहित ने बताया कि दो साल में करीब सवा लाख आटे के दीपक नर्मदा में प्रवाहित किए जा चुके हैं। इस मुहिम में कोमल यादव, सुनीता शुक्ला, अनीता सिरसाट, रेखा चौहान, निशा गुप्ता, गायत्री गुप्ता और अनीता चोयल सहित अनेक महिलाएं निरंतर सक्रिय हैं। नगरवासी अब स्वयं घरों से आटे के दीपक लाकर दीपदान करते हैं। जो नहीं ला पाते, उन्हें महिला मंडल की ओर से बनाए दीपक दिए जाते हैं।
साप्ताहिक श्रमदान – तट की सफाई
महिला मंडल और समिति के सदस्य हर सप्ताह श्रमदान कर नर्मदा तट की सफाई करते हैं। श्रद्धालुओं द्वारा छोड़ी गई निर्माल्य सामग्री और पालिथीन एकत्रित कर उसका उचित निपटान किया जाता है।
