नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क : आरएसएस से जुड़ी पत्रिका आर्गनाइजर ने आरोप लगाया है कि लोकतांत्रिक अधिकारों और आंदोलनों के नाम पर देश की छवि को खराब करना एक फैशन बन गया है। विरोध प्रदर्शनों को भड़काना, जातिगत भावनाओं को उकसाना और संस्थाओं को बदनाम करना कम्युनिस्ट-इस्लामिस्ट गठजोड़ की नई कार्यशैली है। आर्गनाइजर के संपादक प्रफुल्ल केतकर ने चुनाव आयोग के खिलाफ आंदोलन और आईआईटी-मुंबई के एक छात्र की आत्महत्या के बाद हाल में हुए विरोध प्रदर्शन को ऐसी ही “साजिश” से जोड़ते हुए दावा किया कि देश के बाहर की भारत-विरोधी ताकतें इन आंदोलनों को प्रोत्साहित और वित्त पोषित कर रही हैं। केतकर ने पत्रिका में प्रकाशित संपादकीय में कहा कि कुछ विपक्षी दल तात्कालिक राजनीतिक हितों के लिए इस खेल का शिकार हो रहे हैं। नीट पेपर लीक के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शन का जिक्र करते हुए संपादकीय में कहा गया है कि खुद को युवाओं का एकमात्र प्रतिनिधि बताने वाले नेता के नेतृत्व में जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन के बाद से विरोध प्रदर्शनों का एक नया दौर शुरू हो गया है। 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान ‘संविधान खतरे में है’ नैरेटिव के बाद कुछ समय तक शांत रहने के पश्चात अब माहौल को खराब करने के लिए नए मुद्दों और नए तरीके के साथ फिर से सक्रियता दिखाई दे रही है। शिक्षा और जातिगत पहचान के मुद्दों को जोड़कर युवाओं को पहचान आधारित साजिशों में सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया जा रहा है। Post navigation क्या राहुल गांधी भी गैरकानूनी सांसद हैं ?, रिजीजू ने खरगे के आरोप पर किया पलटवार वनडे के बाद अब टी20 सीरीज की बारी, भारतीय टीम वेस्टइंडीज पर भारी