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नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क : फोकस कंटेनर आधारित माल ढुलाई पर है। फ्लाई ऐश, उर्वरक, खाद्यान्न, आटा और दाल जैसे सामान भी अब कंटेनरों में भेजे जा सकेंगे। इससे सामान वर्षा और धूल से सुरक्षित रहेगा।

जरूरत के अनुसार अलग-अलग स्थानों पर उतारा जा सकेगा। पहले पूरा रैक एक साथ खाली होने तक रुका रहता था, मगर कंटेनर प्रणाली से रैक जल्दी खाली होंगे। रेलवे की क्षमता भी बढ़ेगी। रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को आठ नए सुधारों की घोषणा की, जिसके बाद ”रिफॉर्म एक्सप्रेस” के तहत लागू सुधारों की संख्या 17 हो गई है। सरकार का लक्ष्य 52 सप्ताह में 52 सुधार लागू करना है।

इन सुधारों का उद्देश्य सड़क से रेल की ओर माल ढुलाई बढ़ाना है। सड़क परिवहन की तुलना में रेल से माल ढुलाई में लगभग 90 प्रतिशत कम कार्बन उत्सर्जन होता है। कंटेनर आधारित व्यवस्था से माल अधिक सुरक्षित रहेगा, ढुलाई तेज होगी और देश की लॉजिस्टिक्स लागत कम करने में भी मदद मिलेगी।

निजी कंपनियां अपनी जरूरत के अनुसार विशेष माल वैगन डिजाइन कर सकेंगी, जिन्हें परीक्षण के बाद रेलवे नेटवर्क पर चलाया जाएगा। तेल कंपनियां भी विशेष टैंक वैगन खरीद या लीज पर ले सकेंगी। रेल परियोजनाओं में काम करने वाले वेल्डर, फिटर और अन्य कारीगरों के लिए पहली बार प्रमाणन व्यवस्था लागू की गई है, ताकि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और सुरक्षा दोनों को मजबूत किया जा सके।

देश में हर वर्ष लगभग 34 करोड़ टन फ्लाई ऐश निकलती है, जिसका बड़ा हिस्सा अभी उपयोग में नहीं आ पाता

देश में हर वर्ष लगभग 34 करोड़ टन फ्लाई ऐश निकलती है, जिसका बड़ा हिस्सा अभी उपयोग में नहीं आ पाता। अब रेलवे बंद कंटेनरों में इसकी ढुलाई की व्यवस्था करेगा। इससे धूल प्रदूषण कम होगा और फ्लाई ऐश सीमेंट उद्योग तक आसानी से पहुंच सकेगी। सड़कों पर दबाव घटेगा और पर्यावरण को लाभ मिलेगा।

रेलवे ने कंटेनर ट्रेन आपरेटरों की लाइसेंस व्यवस्था भी सरल कर दी है। पहले अलग-अलग श्रेणियां और शुल्क थे, लेकिन अब पूरे देश के लिए एक समान लाइसेंस मिलेगा। इससे कंपनियां रेल नेटवर्क पर कंटेनर ट्रेन चला सकेंगी। निजी निवेश बढ़ेगा, प्रतिस्पर्धा आएगी और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र अधिक सक्षम बनेगा।

रेलवे से देश के लगभग 85 प्रतिशत उर्वरक की ढुलाई होती है, जिसकी किराया प्रणाली को प्रति टन प्रति किलोमीटर के आधार पर सरल बनाया गया है। यही व्यवस्था खाद्यान्न, आटा और दालों पर भी लागू होगी। कंटेनर आधारित परिवहन से गोदामों तक चरणबद्ध आपूर्ति संभव होगी, जिससे किसानों, वितरकों और उपभोक्ताओं को समय पर सामान उपलब्ध कराने में सुविधा होगी।

निर्माण कार्यों में भी कई बदलाव किए गए हैं। ठेकेदारों को शुरुआत में 10 प्रतिशत परफार्मेंस सिक्योरिटी जमा करनी होगी। जिन ठेकेदारों पर उनकी शुद्ध संपत्ति के 50 प्रतिशत से अधिक मूल्य के मुकदमे लंबित होंगे, वे रेलवे टेंडर में भाग नहीं ले सकेंगे। भूमि अधिग्रहण में तेजी के लिए ”रेल भूमि” डिजिटल प्लेटफॉर्म शुरू किया गया है।