भोपाल, संवाददाता : MP News : मध्य प्रदेश में मातृ मृत्यु दर को कम करने के लिए सभी 52 जिला चिकित्सालयों में अब विशेष आब्सटेट्रिक्स आईसीयू और हाई डिपेंडेंसी यूनिट (एचडीयू) को पूरी तरह क्रियाशील किया जा रहा है।
अब प्रसव के दौरान गंभीर रूप से बीमार होने वाली महिलाओं को महानगरों के मेडिकल कॉलेजों में रेफर नहीं होना पड़ेगा। उन्हें जिला स्तर पर ही वह तमाम जीवन रक्षक सुविधाएं मिलेंगी, जो अब तक केवल बड़े निजी अस्पतालों या चुनिंदा मेडिकल कॉलेजों तक सीमित थीं।
26 जिलों में शुरू हुई सुविधा, शेष में काम अंतिम दौर में
प्रदेश में इस योजना का क्रियान्वयन दो चरणों में किया जा रहा है। विभागीय जानकारी के मुताबिक अब तक आधे प्रदेश यानी 26 जिलों के अस्पतालों में यह सेटअप क्रियाशील हो चुका है। यहां प्रसूताओं को विशेषज्ञ सेवाएं मिलना शुरू हो गई हैं। शेष 26 जिलों में बुनियादी ढांचा तैयार है और वहां केवल वेंटिलेटर व मल्टी-पैरा मॉनिटर जैसे उपकरणों की स्थापना का काम शेष है, जिसे विभाग इसी वित्तीय वर्ष के अंत तक पूरा करने का दावा कर रहा है।
चार से छह बिस्तर का अत्याधुनिक सेटअप रहेगा
अक्सर देखा जाता है कि प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव (पीपीएच) या अचानक बीपी बढ़ने जैसी जटिलताओं के मामले में जिला अस्पतालों से रेफरल की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। लंबी दूरी तय करने के कारण प्रसूता ‘गोल्डन आवर’ खो देती है, जिससे उसकी जान जाने का जोखिम बढ़ जाता है। नई व्यवस्था के तहत हर जिले में चार से छह बेड का अत्याधुनिक सेटअप होगा। यहां वेंटिलेटर, मल्टी-पैरा मॉनिटर और अन्य जीवन रक्षक उपकरण 24 घंटे उपलब्ध रहेंगे।
प्रशिक्षित स्टाफ की होगी तैनाती
अत्याधुनिक सेवाओं के तहत केवल मशीनें ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य विभाग यहां स्टाफ की तैनाती पर भी विशेष ध्यान दे रहा है। प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञों के साथ-साथ निश्चेतना विशेषज्ञों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। साथ ही नर्सिंग स्टाफ को ‘क्रिटिकल केयर इन आब्सटेट्रिक्स’ का विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे आईसीयू में भर्ती गंभीर प्रसूताओं की बेहतर देखभाल कर सकें।
