नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क: सुप्रीम कोर्ट ने एक बैंक के सीनियर मैनेजर की बर्खास्तगी को बरकार रखते हुए कहा कि अधिकार बढ़ने के साथ-साथ जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। ऊंचे पद पर बैठा कोई भी दोषी अधिकारी उसी गलत काम के लिए अपने से नीचे के रैंक वाले कर्मचारियों जैसी सजा की मांग नहीं कर सकता।
इसी के साथ जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश को रद कर दिया, जिसमें उसकी बर्खास्तगी की सजा को अनिवार्य सेवानिवृत्ति में बदल दिया गया था।
शीर्ष अदालत ने उन आरोपों पर गौर किया कि सीनियर मैनेजर ने एक अन्य बैंक अधिकारी और एक गनमैन के साथ मिलकर ग्राहकों के पैसे का निजी लाभ के लिए गबन किया और बैंक रिकार्ड चुरा लिए।
हाई कोर्ट ने कहा था कि समान आरोपों के लिए अन्य दोषियों-बैंक अधिकारी और गनमैन को अलग सजाएं दी गई थीं लेकिन वरिष्ठ प्रबंधक को सबसे कड़ी सजा दी गई थी।
बैंक हाई कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। शीर्ष कोर्ट ने फैसले में कहा कि अधिकार के साथ-साथ जिम्मेदारी भी आती है। जितना पद ऊंचा होगा, जिम्मेदारी भी उतनी ही बढ़ती जाएगी।
