SIR करने की है शक्ति और क्षमता, सु्प्रीम कोर्ट में बोला चुनाव आयोग

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नई दिल्ली ,डिजिटल डेस्क : चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उसके पास मतदाता सूची का विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) करने की शक्ति और क्षमता है। इसके अलावा यह एक संवैधानिक कर्तव्य है कि कोई विदेशी मतदाता के रूप में पंजीकृत नहीं हो। यह प्रस्तुतियां चुनाव आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने पीठ के समक्ष दीं।

द्विवेदी अपने तर्कों को कल 8 जनवरी को फिर से आगे बढ़ाएंगे। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने मंगलवार को बिहार सहित कई राज्यों में एसआईआर अभ्यास करने के चुनाव आयोग के निर्णय को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई फिर से शुरू की, जिसमें चुनाव आयोग की शक्तियों, नागरिकता और मतदान के अधिकार पर महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रश्न उठाए गए।

चुनाव आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने बताया कि राज्य के तीन अंगों में सभी प्रमुख संवैधानिक कार्यकर्ताओं को भारतीय नागरिक होना चाहिए

चुनाव आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने बताया कि राज्य के तीन अंगों में सभी प्रमुख संवैधानिक कार्यकर्ताओं को भारतीय नागरिक होना चाहिए और उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 124(3) का उल्लेख किया, जो सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति से संबंधित है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री जैसे शीर्ष संवैधानिक कार्यकर्ताओं की नियुक्ति के लिए एक प्रमुख शर्त यह है कि व्यक्ति भारतीय नागरिक होना चाहिए।

सभी महत्वपूर्ण नियुक्तियां बल्कि कोई नियुक्ति नहीं की जा सकती जब तक व्यक्ति नागरिक न हो, इसलिए हमारा संविधान नागरिक-केंद्रित है। उन्होंने कहा, ”जब (संविधान का) अनुच्छेद कहता है नागरिक, तो इसकी जांच सक्षम प्राधिकरण द्वारा की जानी चाहिए। चुनाव आयोग को राजनीतिक दलों की बयानबाजी पर प्रतिक्रिया नहीं देनी चाहिए, क्योंकि चुनाव आयोग का कर्तव्य है कि कोई विदेशी वहां नहीं हो। यह देखना ही शक्ति और क्षमता दोनो है।

उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के मतदाता सूची के संशोधन के क्षेत्र में अधिकार को समाप्त नहीं करते हैं। एसआईआर के संभावित समानांतर नागरिकता निर्धारण अभ्यास के रूप में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के संबंध में चिंताओं का समाधान करते हुए उन्होंने जोर दिया कि मतदाता सूची और एनआरसी मूलत: भिन्न उद्देश्यों की सेवा करते हैं। एनआरसी में सभी व्यक्ति शामिल होते हैं, जबकि मतदाता सूची में केवल 18 वर्ष से ऊपर के नागरिक शामिल होते हैं।

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