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काबुल, डिजिटल डेस्क : 15 अगस्त 2021 को तालिबान के सत्ता में लौटने के पांच साल पूरे होने पर अफगानिस्तान की महिलाओं और लड़कियों की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। सत्ता संभालते ही तालिबान ने महिलाओं को शिक्षा, रोजगार और समाज में भागीदारी का वादा किया था, लेकिन वास्तविकता पूरी तरह उलटी साबित हुई।

तालिबान प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने 17 अगस्त 2021 को पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि महिलाएं काम कर सकेंगी, पढ़ सकेंगी और समाज में भाग ले सकेंगी, बशर्ते वे उनके इस्लामी कानून की व्याख्या का पालन करें।

उसी दिन स्काई न्यूज को दिए इंटरव्यू में प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने स्पष्ट रूप से कहा था कि अफगान महिलाएं विश्वविद्यालय स्तर तक शिक्षा हासिल कर सकेंगी और काम जारी रख सकेंगी। लेकिन इन वादों के बाद प्रतिबंधों की एक लंबी श्रृंखला शुरू हो गई।

शिक्षा पर सबसे बड़ा हमला

  • सितंबर 2021 में जब माध्यमिक स्कूल फिर खुले, तो लड़कों को कक्षाओं में लौटने की अनुमति मिली, लेकिन ज्यादातर लड़कियों को घर पर ही रोका गया।
  • 23 मार्च 2022 को तालिबान ने अचानक लड़कियों के माध्यमिक स्कूल फिर से खोलने का फैसला रद्द कर दिया। छठी कक्षा के बाद लड़कियों की औपचारिक शिक्षा पर प्रभावी रूप से रोक लग गई।
  • दिसंबर 2022 में महिलाओं को सार्वजनिक और निजी विश्वविद्यालयों में जाने से रोक दिया गया।
  • यूनेस्को और यूनिसेफ की संयुक्त रिपोर्ट “अफगानिस्तान एजुकेशन सिचुएशन रिपोर्ट 2026” के अनुसार, 2021 के बाद से 26 लाख से ज्यादा किशोर लड़कियों को माध्यमिक शिक्षा से वंचित रखा गया है। अफगानिस्तान के प्राथमिक स्कूल आयु वर्ग के 53 प्रतिशत बच्चे अब औपचारिक शिक्षा से बाहर हैं।

राष्ट्रीय आकलन में 55,000 से ज्यादा चौथी कक्षा के छात्रों में से आधे से भी कम ने भाषा में न्यूनतम दक्षता हासिल की, जबकि गणित में सिर्फ एक-चौथाई बच्चे ही स्तर पर पहुंचे। तीन-चार साल के बच्चों में से 100 में से एक से भी कम बच्चे प्रारंभिक शिक्षा कार्यक्रमों में भाग लेते हैं।

रोजगार और आजादी पर प्रतिबंध

  • दिसंबर 2022 में महिलाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) में काम करने से रोक दिया गया।
  • अप्रैल 2023 में संयुक्त राष्ट्र के लिए काम करने वाली अफगान महिलाओं पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया।
  • अगस्त 2024 में गुणों को बढ़ावा देने और बुराइयों को रोकने का कानून लागू किया गया, जिसमें महिलाओं के सार्वजनिक व्यवहार, कपड़ों और आवाज पर भी पाबंदियां लगाई गईं।

यूएन वीमेन के अगस्त 2026 के आकलन के अनुसार, तालिबान ने सत्ता में लौटने के बाद महिलाओं और लड़कियों को प्रभावित करने वाले 100 से ज्यादा फरमान जारी किए हैं। सर्वेक्षण में शामिल आधी से ज्यादा महिलाएं महीने में सिर्फ एक-दो बार ही घर से बाहर निकलती हैं, जबकि लगभग तीन-चौथाई महिलाएं बिना पुरुष अभिभावक के बाहर जाना असुरक्षित महसूस करती हैं।