UP : तीन लाख पौधरोपण करके गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज करने की तैयारी

varansi-news

वाराणसी, संवाददाता : Varanasi News: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वाराणसी के सर्किट हाउस में इस पौधरोपण कार्यक्रम के संबंध में प्रस्तुतिकरण देखेंगे। इसके बाद प्रमाण पत्र प्रदान करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गोद लिया पूर्व गांव डोमरी में रचा जाएगा इतिहास। पौधरोपण के लिए सेक्टर बांटे गए। हर सेक्टर का नाम घाटों के नाम से रखा गया।

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पूर्व में गोद लिया गांव डोमरी एक मार्च को इतिहास रच सकता है। इस दिन 20 हजार लोग एक साथ पौधरोपण करेंगे। यह कार्यक्रम सुबह 8 बजे से करीब एक घंटे तक 350 बीघा जमीन पर चलेगा। लगभग 3 लाख पौधे रोपे जाएंगे। यदि यह सफल रहा तो यह वर्ल्ड रिकॉर्ड बन जाएगा। 

जिला प्रभारी मंत्री सुरेश खन्ना ने शनिवार को मेयर अशोक तिवारी और नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल के साथ निरीक्षण कर तैयारियां देखीं। पौधरोपण के बाद सर्किट हाउस में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इसका प्रस्तुतिकरण देखेंगे।

नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने बताया कि इस प्रोजेक्ट के लिए मध्यप्रदेश की एमबीके संस्था के साथ समझौता किया गया है। यह तीसरे वर्ष से निगम को दो करोड़ रुपये की आय देगी और सातवें वर्ष तक वार्षिक आय सात करोड़ रुपये तक पहुंचने की संभावना है। यहां मियावाकी तकनीक के साथ-साथ औषधीय पौधों और फूलों की खेती भी होगी। यह केवल एक बगीचा नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर इको-सिस्टम विकसित करने का प्रयास है। इसमें फलों के बाग, आयुर्वेदिक खेती और फूलों की खेती का समन्वय होगा।

तैयारी पूरी

परियोजना के तीसरे वर्ष आम, अमरूद, पपीता, अनार जैसे फलदार पेड़ और अश्वगंधा, शतावरी, गिलोय, एलोवेरा जैसे औषधीय पौधे तथा गुलाब, चमेली और पारिजात के फूलों से राजस्व आरंभ होगा। तीसरे वर्ष निगम को दो करोड़ रुपये, पांचवें वर्ष पांच करोड़, छठे वर्ष छह करोड़ और सातवें वर्ष तक सात करोड़ रुपये वार्षिक अनुमानित आय होगी। 

सिंचाई के लिए पांच बोरवेल लगाए गए हैं। मार्च-जून के प्रचंड गर्मी में पौधों को पानी देने के लिए सप्ताह में तीन बार 45 मिनट का विशेष शेड्यूल तय किया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार मार्च का पहला हफ्ता पौधरोपण के लिए सबसे अनुकूल है। मानसून से पहले पौधों की जड़ें जम जाएंगी और यह मिट्टी के कटाव को रोकने में मदद करेंगी। 

अप्रैल-मई की गर्मी से पहले पौधे नए वातावरण में ढल जाएंगे। इस मियावाकी वन में बांस, कचनार, महुआ और हरसिंगार सहित कुल 27 प्रकार के देशी पेड़ शामिल हैं। शीशम और अर्जुन को प्राथमिकता दी गई है, जो नदी किनारे के वातावरण और अस्थायी जलभराव को सहन कर सकते हैं।

परियोजना एक नजर में

  • पौधों की संख्या: 3,17,120
  • पाइपलाइन का जाल: 10,827 मीटर
  • आधुनिक सिंचाई: 360 रेनगन स्प्रिंकलर
  • कुल अनुमानित आय: 19.80 करोड़ रुपये (5 वर्षों में)
  • सिंचाई नेटवर्क: 10,827 मीटर पाइपलाइन और 10 बोरवेल
  • तकनीकी उपकरण: 360 रेन गन स्प्रिंकलर सिस्टम
  • चार किलोमीटर पाथवे
India’s cricketers will score 200 against New Zealand Designs of Mehendi for Karwa Chauth in 2024 Indian Women’s T20 World Cup Qualifiers Simple Fitness Advice for the Holidays Top 5 Business Schools in the World