नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क : लोकसभा में शुक्रवार को लगातार हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही 9 मार्च तक के लिए स्थगित कर दी गई। कार्यवाही की शुरुआत से ही विपक्षी दलों के शोर-शराबे के चलते सदन सुचारू रूप से नहीं चल सका। इससे पहले कई मंत्रियों ने अपने-अपने मंत्रालयों से संबंधित दस्तावेज सदन के पटल पर रखे।
एपस्टीन मुद्दे पर विपक्ष का विरोध
सुबह 11 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सदस्य नारेबाजी करते हुए वेल में पहुंच गए। उन्होंने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के कथित तौर पर जेफरी एपस्टीन से संबंधों के आरोप को लेकर इस्तीफे की मांग की।
लोकसभा की कार्यवाही से पहले भी विपक्षी दलों ने एपस्टीन फाइलों के मुद्दे पर संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। हालांकि, हरदीप सिंह पुरी ने कांग्रेस के दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया।
कोडीन सिरप से मौतों का मुद्दा
कांग्रेस सांसद उज्ज्वल रमन सिंह ने कोडीन सिरप के सेवन से हुई ‘कई मौतों’ का मुद्दा उठाते हुए केंद्र सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में पीड़ितों को पांच-पांच लाख रुपए मुआवजा देने और दोषियों के खिलाफ सीबीआई जांच की मांग की।
प्रश्नकाल के दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि किसी की मौत ‘कोडीन’ से नहीं हुई है, इसलिए मुआवजा देने का सवाल ही नहीं उठता। उनके बयान के बावजूद कांग्रेस, टीएमसी और डीएमके समेत अन्य विपक्षी दलों का हंगामा जारी रहा।
दो बार स्थगन के बाद 9 मार्च तक टली कार्यवाही
हंगामे के बीच पीठासीन अधिकारी संध्या राय ने विपक्षी सदस्यों से सदन की कार्यवाही चलने देने की अपील की, लेकिन शोर-शराबा जारी रहने पर पहले कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित करनी पड़ी।
दोपहर बाद कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, जिसमें कई मंत्रियों ने अपने मंत्रालयों से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत किए। इसके बाद सदन को 9 मार्च तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
