नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क :महादेव के प्रति गहरी आस्था रखने वाले अभिनेता और गोरखपुर से सांसद रवि किशन के लिए आध्यात्मिकता केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक ऐसी शक्ति है जिसने उन्हें लंबे संघर्ष, असफलताओं और चुनौतियों के बीच भी संतुलित बनाए रखा। वे मानते हैं कि फिल्म उद्योग हो या कोई अन्य क्षेत्र, निरंतर दबाव और प्रतिस्पर्धा के कारण लोग जल्दी टूट जाते हैं, लेकिन आध्यात्मिक आधार व्यक्ति को धैर्य और स्थिरता देता है। महाशिवरात्री के मौके पर रवि कहते हैं कि लोग लंबे संघर्ष से परेशान हो जाते हैं, जबकि मैंने 34 साल इंतजार किया। अब मुझे पुरस्कार और सम्मान मिल रहे हैं। अगर आध्यात्म नहीं होता, तो लोग सुसाइड करने तक की सोचने लगते हैं या अल्कोलिक हो जाते हैं। भगवद्गीता का संदेश है कर्म करो, फल की चिंता मत करो। मैं इसमें यकीन करता हूं।
पिता थे पुजारी
रवि किशन के पिता पुजारी थे और बचपन से ही धार्मिक वातावरण में उनका पालन-पोषण हुआ। सुबह जल्दी उठना, पूजा-अर्चना करना और ध्यान लगाना उनकी पारिवारिक दिनचर्या का हिस्सा था। वह कहते हैं कि आज भी ध्यान मेरे जीवन का अभिन्न अंग है। ध्यान केवल बैठकर आंखें बंद करने तक सीमित नहीं है, बल्कि हर कार्य में सजगता और ईश्वर स्मरण बनाए रखना ही सच्चा ध्यान है।
भगवान ने दी दुख झेलने की शक्ति
महादेव के नीलकंठ स्वरूप को रवि किशन अपने जीवन का प्रतीक मानते हैं। जैसे भगवान शिव ने समुद्र मंथन से निकला विष पीकर उसे गले में रोक लिया था, वैसे ही उन्होंने अपने जीवन के अपमान, संघर्ष और कठिनाइयों को सहते हुए उन्हें अपने भीतर शक्ति में बदला। आगे रवि किशन कहते हैं कि कठिनाइयों को भीतर इस तरह रोकना चाहिए कि वे हमें मजबूत बनाएं, लेकिन हमारे व्यवहार या व्यक्तित्व को विषाक्त न करें। दुख तो जीवन में आना ही है। लेकिन उससे उबरना ही जीवन है।
भगवान ने दी दुख झेलने की शक्ति
महादेव के नीलकंठ स्वरूप को रवि किशन अपने जीवन का प्रतीक मानते हैं। जैसे भगवान शिव ने समुद्र मंथन से निकला विष पीकर उसे गले में रोक लिया था, वैसे ही उन्होंने अपने जीवन के अपमान, संघर्ष और कठिनाइयों को सहते हुए उन्हें अपने भीतर शक्ति में बदला। आगे रवि किशन कहते हैं कि कठिनाइयों को भीतर इस तरह रोकना चाहिए कि वे हमें मजबूत बनाएं, लेकिन हमारे व्यवहार या व्यक्तित्व को विषाक्त न करें। दुख तो जीवन में आना ही है। लेकिन उससे उबरना ही जीवन है।
एक्टर की आने वाली फिल्में
फिल्म मां बहन में वह माधुरी दीक्षित के साथ नजर आएंगे। उनके साथ काम करने को लेकर रवि कहते हैं कि तेजाब फिल्म के समय से ही मैं उनका प्रशंसक हूं। वह मेरी दो पसंदीदा अभिनेत्रियों में से एक रही हैं। पहली पसंद श्रीदेवी रही हैं, साल 1994 में मैंने उनके साथ आर्मी फिल्म में काम किया था। अब माधुरी जी के साथ मौका मिला बहुत मजा आया। वह बेहद प्रोफेशनल और बहुत विनम्र महिला हैं। वह वर्तमान में जीती हैं। शायद इसी वजह से वह आज भी काम कर रही हैं।
