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नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क : सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने बुधवार को राज्यसभा में राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम अधिनियम, 1962 में संशोधन से संबंधित विधेयक पेश किया, जिसे सदन ने पारित कर दिया। हालांकि, विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के सदस्य सदन में मौजूद नहीं थे। विपक्ष के अधिकांश दलों ने सदन से वॉकआउट किया।

सहकारिता क्षेत्र में बड़ी प्रगति का दावा

विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने कहा कि देश में सहकारिता क्षेत्र को विकास की मुख्यधारा में लाने का काम शुरू हो चुका है और पिछले पांच वर्षों में इस क्षेत्र में बड़ी प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि आज देश में 8 लाख से अधिक सहकारी संस्थाएं काम कर रही हैं, जिनसे करीब 30 करोड़ सदस्य जुड़े हुए हैं।

80,000 पैक्स का हो रहा कंप्यूटरीकरण

मोहोल ने कहा कि भारत का सहकारी क्षेत्र दुनिया के सबसे बड़े सहकारी नेटवर्क में से एक है। सहकारिता मंत्रालय की स्थापना के बाद पिछले पांच वर्षों में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं। करीब 3,000 करोड़ रुपए की लागत से देश की 80,000 प्राथमिक कृषि साख समितियों (पैक्स) का कंप्यूटरीकरण किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि छोटे गांवों में पैक्स को सक्षम बनाने के लिए मॉडल उपनियम बनाए गए हैं और देश के सभी राज्यों ने इन्हें अपनाया है। पैक्स को करीब 25 अलग-अलग प्रकार के कारोबार करने का अवसर दिया गया है। सहकारिता के विस्तार के लिए देश में 2 लाख नई बहुउद्देश्यीय पैक्स बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इनमें से करीब 40,000 नई पैक्स का गठन अब तक किया जा चुका है।

दूध उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य

सहकारिता राज्य मंत्री ने कहा कि ‘श्वेत क्रांति 2.0’ के तहत देश में दूध उत्पादन को प्रतिदिन 660 लाख किलोग्राम से बढ़ाकर 1,000 लाख किलोग्राम करने का लक्ष्य रखा गया है। किसानों को बीज से बाजार तक पूरी मूल्य श्रृंखला उपलब्ध कराने के लिए तीन नई बहुराज्यीय सहकारी समितियां बनाई गई हैं।

उन्होंने बताया कि अब तक देश की 70,000 से अधिक सहकारी समितियां इन तीनों बहुराज्यीय सहकारी समितियों की सदस्य बन चुकी हैं। शहरी सहकारी बैंकों के लिए एक शीर्ष संगठन का गठन किया गया है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों के लिए ‘सहकार सारथी’ की स्थापना की गई है।

17 लाख युवाओं को प्रशिक्षित करने की तैयारी

मोहोल ने कहा कि सहकारी क्षेत्र को प्रशिक्षित और कुशल मानव संसाधन उपलब्ध कराने के लिए त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय की स्थापना की गई है। इस विश्वविद्यालय के माध्यम से अगले पांच वर्षों में 17 लाख युवाओं को प्रशिक्षित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सहकारिता की भावना पर आधारित भारत टैक्सी की भी शुरुआत की गई है। मोहोल के मुताबिक, पिछले केवल पांच वर्षों में 163 से अधिक पहल की गई हैं।

एनसीडीसी का कार्यक्षेत्र बढ़ाना महत्वपूर्ण कदम

सहकारिता राज्य मंत्री ने कहा कि इन पहलों में राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) का कार्यक्षेत्र बढ़ाना भी एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि एनसीडीसी पिछले छह दशकों से देशभर की सहकारी संस्थाओं को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराकर कृषि, डेयरी, मत्स्य पालन, भंडारण और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने का काम कर रहा है।

उन्होंने कहा कि सहकारी क्षेत्र में नई तकनीक, नए कारोबारी मॉडल, मूल्य संवर्धन, खाद्य प्रसंस्करण, निर्यात और लॉजिस्टिक्स के नए अवसर उभर रहे हैं। ऐसे में राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम अधिनियम, 1962 को वर्तमान और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप आधुनिक बनाना जरूरी है, ताकि आने वाले वर्षों में सहकारी क्षेत्र के विकास को और गति दी जा सके।

राज्यों की स्वायत्तता पर दी सफाई

राज्यों की स्वायत्तता को लेकर विपक्ष की आशंकाओं का जवाब देते हुए मोहोल ने कहा कि केंद्र सरकार ने कभी भी राज्यों की सहकारी संस्थाओं से संबंधित नीतियों में हस्तक्षेप करने का उद्देश्य नहीं रखा है। उन्होंने कहा कि मंत्रालय ने हमेशा राज्य सरकारों को साथ लेकर काम किया है।

पैक्स के कंप्यूटरीकरण का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत यह नहीं देखा गया कि किस राज्य में किस राजनीतिक दल की सरकार है। गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के साथ-साथ तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और केरल में भी काम किया जा रहा है।

किसानों के जीवन को समृद्ध करना लक्ष्य

मोहोल ने कहा, ‘‘हमारी नीति स्पष्ट है कि सहकारिता को बढ़ावा देना है और सहकारिता के माध्यम से किसानों के जीवन को समृद्ध करना है।’’