नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क : भारत और नेपाल के बीच सदियों पुराना ‘रोटी-बेटी’ का रिश्ता अब डिजिटल युग की नई चमक से सराबोर हो गया है। दोनों पड़ोसी देशों ने प्रवासी कामगारों और उनके परिवारों को एक अनूठा तोहफा देते हुए क्रॉस-बार्डर डिजिटल रेमिटेंस (पैसा भेजने की) सेवा की शुरुआत की है। भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) और नेपाल के नेशनल पेमेंट्स इंटरफेस (एनपीआई) के आपस में जुड़ जाने से अब दोनों देशों के नागरिक पलक झपकते ही सीधे अपने घर पैसे भेज सकेंगे। यह केवल दो तकनीकों का मिलन नहीं है, बल्कि भारत में दिन-रात पसीना बहाने वाले नेपाली श्रमिकों और नेपाल में कार्यरत भारतीय नागरिकों की उम्मीदों को मिला एक नया पंख है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) की अंतरराष्ट्रीय शाखा ‘एनआईपीएल’ और ‘नेपाल क्लियरिंग हाउस लिमिटेड (एनसीएचएल)’ की यह संयुक्त पहल दोनों देशों के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ करेगी। आसान और सुरक्षित सफर न बैंक खाते की चिंता, न भारी-भरकम खर्च पारंपरिक माध्यमों से घर पैसे भेजने में लगने वाले लंबे वक्त और भारी कमीशन से अब लाखों परिवारों को मुक्ति मिल जाएगी। यह नई व्यवस्था पूरी तरह सुरक्षित, बेहद सस्ती और रीयल टाइम पर काम करने वाली है। इस सेवा की सबसे बड़ी खूबसूरती इसकी सादगी है। अब पैसे भेजने के लिए किसी को भी अपने बैंक खाते की संवेदनशील जानकारियां साझा करने की जरूरत नहीं होगी। यूजर्स केवल मोबाइल नंबर, वर्चुअल पेमेंट एड्रेस (वीपीए) या यूपीआई आइडी के जरिये सीधे सामने वाले के खाते में पैसे ट्रांसफर कर सकते हैं। फिलहाल यह सेवा एवेरेस्ट बैंक, ग्लोबल आइएमई बैंक, नबील बैंक और नेपाल एसबीआई बैंक जैसे चुनिंदा बैंकों के माध्यम से लाइव हो चुकी है और जल्द ही इसका दायरा अन्य वित्तीय संस्थानों तक बढ़ाया जाएगा। वित्तीय समावेशन का नया सवेरा लेन-देन की सीमाएं और वैश्विक लक्ष्य यह कदम न केवल दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को मजबूत करता है, बल्कि वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के जी-20 के वैश्विक लक्ष्यों के भी पूरी तरह अनुकूल है। इस समझौते के तहत सीमाओं और जरूरतों का भी पूरा ख्याल रखा गया है। नेपाल से भारत पैसे भेजने वाले यूजर्स प्रति ट्रांजैक्शन 15 हजार रुपये और महीने में अधिकतम एक लाख रुपये तक भेज सकते हैं। वहीं, भारत से नेपाल पैसे भेजने वाले यूजर्स के लिए प्रति ट्रांजैक्शन दो लाख रुपये की सीमा तय की गई है, जिसमें मासिक लेनदेन पर कोई प्रतिबंध नहीं है। तकनीक के इस मानवीय चेहरे ने सीमाओं की दूरियों को मिटाकर दोनों देशों के दिलों को और करीब ला दिया है। Post navigation जिमखाना क्लब मामले पर दिल्ली हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी UN में भारत का अफगानिस्तान को खुला समर्थन