लखनऊ, संवाददाता : भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय में अगले माह से शुरू होने जा रही प्रस्तुतिपरक ग्रीष्मकालीन कार्यशाला में पहली बार गजल गायिकी के गुर भी सिखाए जाएंगे। इससे पहले गायन, वादन और नृत्य की विधाओं में गजल को शामिल नहीं किया गया था। कार्यशाला की अवधि एक माह की होगी और इसकी शुरुआत 26 मई से होगी।
भातखंडे संस्कृति विवि की कुलपति प्रो. मांडवी सिंह ने बताया कि पहली बार विवि की कार्यशाला में गजल गायिकी का प्रशिक्षण दिया जाएगा। शुल्क पिछले वर्ष की तरह दो हजार रुपये ही रखा गया है। कुलसचिव डॉ. सृष्टि धवन ने बताया कि 26 मई से 25 जून तक होने वाली कार्यशाला में सुबह नौ से 10 बजे तक और 10 से 11 बजे तक शास्त्रीय गायन, सुगम संगीत, लोकगीत, तबला, पखावज, ढोलक, सितार, वायलिन, गिटार (वेस्टर्न) ।
बांसुरी, हारमोनियम, कीबोर्ड, कथक नृत्य, भरतनाट्यम्, लोकनृत्य, सारंगी, सरोद, पेंटिंग एवं क्ले मॉडलिंग का प्रशिक्षण दिया जाएगा। दिव्यांग और ऑटिस्टिक बच्चों के लिए शास्त्रीय गायन की विशेष कार्यशाला होगी। प्रवेश के लिए एक मई से 20 मई तक ऑनलाइन और ऑफलाइन आवेदन कार्यालय दिवस में सुबह 11 से शाम पांच बजे तक वितरित व जमा किए जाएंगे।
कथक संस्थान में 14 मई से शुरू होगी कार्यशाला
पंडित बिरजू महाराज कथक संस्थान में 14 मई से 14 जून तक कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा जिसमें कथक नृत्य का प्रशिक्षण दिया जाएगा। संस्थान की अध्यक्ष डॉ. कुमकुम धर ने बताया कि हॉबी कोर्सेज की भी शुरुआत भी हो रही है इसमें गायन, नृत्य के साथ ही तबले और हारमोनियम का वादन सिखाया जाएगा। छह माह के इस कोर्स का शुल्क प्रति माह 300 रुपये रहेगा। कार्यशाला का शुल्क 600 रुपये है।
