Lucknow : वृक्ष लगाकर झांसी की रानी के बलिदान दिवस पर अर्पित की श्रद्धांजलि

TREE-PLANTATION

लखनऊ,शिव सिंह :

पुलिस लाइन में वृक्षारोपण करो झांसी वाली रानी के नाम से।
छोड़ी घूंघट की लाज अंग्रेजों को धूल चटाई जिसने तलवार से।।

उपरोक्त पंक्तियों का उद्घोष करते हुए फलदार आम के वृक्ष लगाकर झांसी की रानी के बलिदान दिवस पर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट के आर आई श्री होरीलाल सिंह के नेतृत्व में ओज कवि मुकेशानंद ने अनारा देवी शहीद संस्थान के सहयोग से समाज सेवी मुख्य अतिथि पीजी नेशनल कॉलेज की प्रोफेसर डॉ ऋतु जैन एवं भोजपुरी कवि व समाजसेवी कृष्णानंद राय एसआई श्री श्याम सुंदर मेजर कामता प्रसाद और रामकृष्ण प्रेमवीर लोकेश संजय अजय पीटीआई धीरज कुमार यादव प्रवीण कुमार व कमिश्नर पुलिस के अन्य कर्मचारियों ने श्रद्धांजलि अर्पित करके बृक्ष लगाने का संकल्प लिया।

पीजी नेशनल कॉलेज सीड बैंक बनाने के लिए तैयार

कवि मुकेश आनंद ने बताया की मुख्य अतिथि पीजी नेशनल कॉलेज की डॉ ऋतु जैन अपने पति और बच्चों को लेकर पुलिस परिसर में झांसी वाली रानी को श्रद्धांजलि देने आई है। मुझे बड़ा गर्व है कि अगर हर कॉलेज में एक एक प्रोफेसर पर्यावरण के लिए समर्पित हो जाए तो हकीकत में यह लखनऊ का शहर बागों का शहर है मैं ऑक्सीजन के शहर में बदल दूंगा आएंगी रोकें रुकावटें सच कहता हूं बर्फ तरफ से पिघला दूंगा।

मुख्य अतिथि डा ऋतू जैन ने कहा कि हमारे पीजी नेशनल कॉलेज के हजारों बच्चे सीड बैंक बनाने के लिए तैयार हैं मैं उसकी प्रभारी हूं और हमारे कॉलेज का बच्चा-बच्चा जगह-जगह भारत के कोने कोने में पर्यावरण की अलख जगाएगा। और शहीदों का हमारे ऊपर कितना कर्ज है कि जिनकी यादों में कार्यक्रम करना हमारा फर्ज है। भोजपुरी कृष्णानंद कवि ने अपनी कविताओं के माध्यम से पर्यावरण की अलख जगाई पेड़ लगाकर हरियाली से पर्यावरण बचाना है नदियों का जल स्वच्छ रहे साफ सफाई अपनाना है। एसआई श्री श्याम सुंदर ने सभी देशभक्तों को पर्यावरण प्रेमियों को धन्यवाद दिया और निरंतर सहयोग करने की कामना की।

मुकेश आनंद का संकल्प है कि हमारा रिटायरमेंट का आखिरी समय है, इसलिए हम तो जाने वाले हैं आओ कुछ कर चलें जो आने वाले हैं। कम से कम 100 फलदार आम के वृक्ष लगाकर पुलिस लाइन से प्रस्थान करुंगा। यही मेरी शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। मुकेश आनंद ने बताया इस पर्यावरण यज्ञ में हमारे साथ लखनऊ के ही नहीं आशा पाठक जैसे समाजसेवी जिले जिले से संपर्क में हैं जो निरंतर वृक्षों पर काम कर रहे हैं मैं उन्हें भी तहे दिल से धन्यवाद देता हूं।

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