गाड़ी चढ़ाने- शिखा काटने वाले का न्याय भगवान ने किया : पीयूष राय

KRISHNANAND-RAY

लखनऊ,संवाददाता : लखनऊ के सिविल कोर्ट में बुधवार को हुई गोलीबारी में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुख्यात अपराधी संजीव महेश्वरी उर्फ जीवा की गोली मारकर हत्या कर दी गई। संजीव महेश्वरी जीवा माफिया मुख्तार अंसारी का खास शूटर रहा है और उसका नाम कृष्णानंद राय और ब्रह्मदत्त द्विवेदी हत्याकांड में भी नाम आया था।

कृष्णानंद राय के बेटे ने ट्विटर पर लिखी यह बात

वहीं कृष्णानंद राय के बेटे पीयूष राय ने शलभ मणि त्रिपाठी के ट्वीट को रिट्वीट करते हुए लिखा-
जिस बर्बरता से गाड़ी के ऊपर चढ़कर हत्या को अंजाम दिया गया और उसके बाद पिताजी की शिखा काटी गई। आज उसका फैसला न्याय के मंदिर में भगवान द्वारा किया गया। फैसले में देर हैं, अंधेर नहीं चाहे न्यायालय का हो या भगवान का।

उस समय ब्रह्मदत्त द्विवेदी यूपी की सियासत में बड़ा नाम हुआ करते थे और मायावती के जीवन रक्षक भी कहे जाते हैं। कहा जाता है जब वर्ष 1995 में मायावती पर हमला किया गया था तो ब्रह्मदत्त द्विवेदी ही मदद के लिए सामने आए थे। इस केस को गेस्ट हाउस कांड के नाम से जाना जाता है।

ब्रह्मदत्त द्विवेदी की हत्या
10 फरवरी 1997 में जब वह फर्रुखाबाद में शादी समारोह से लौट रहे थे, तभी कुछ लोगों ने अंधाधुंध गोलियां बरसाकर ब्रह्मदत्त द्विवेदी की हत्या कर दी। इस हत्याकांड में 4 लोगों को नामजद किया गया। जिसमें संजीव उर्फ़ जीवा का नाम भी शामिल था।

इस केस की जांच सीबीआई को सौंपी गई, जिसमें राजनीतिक फायदे के लिए हत्या का मामला सामने आया। 2003 में कोर्ट ने संजीव महेश्वरी उर्फ जीवा और विजय सिंह को इस केस में आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

25 नवंबर 2005 को जीवा ने कृष्णानंद राय हत्याकांड को भी दिया थाअंजाम

कहा जाता है कि 25 नवंबर 2005 को संजीव उर्फ़ जीवा ने मुहम्मदाबाद के तत्कालीन भाजपा विधायक कृष्णानंद राय हत्याकांड को भी अंजाम दिया था। उसने गाड़ी के बोनट पर चढ़कर एके-47 से ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर न सिर्फ विधायक बल्कि 7 लोगों को मौत के घाट उतार दिया था। इस घटना के बाद से पूरे पूर्वांचल में मुख्तार अंसारी और संजीव उर्फ़ जीवा के नाम का भय था।

ये थे आरोपित
विधायक हत्याकांड में अफजाल अंसारी, मुख्तार अंसारी, संजीव महेश्वरी उर्फ़ जीवा, एजाजुलहक, राकेश पांडेय, रामू मल्लाह, मंसूर अंसारी, मुन्ना बजरंगी का नाम सामने आया था ,जबकि, बाद में सभी कोर्ट से बरी हो गए थे।

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