नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क : पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की सरकार ने कट्टरपंथियों के दबाव में आकर लाहौर की ऐतिहासिक सड़कों और गलियों के पुराने नाम बहाल करने की योजना को फिलहाल टाल दिया है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य विभाजन से पहले की सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित करना था, लेकिन विरोध के बाद सरकार अपने कदम पीछे खींचने को मजबूर हो गई। ‘लाहौर हेरिटेज एरियाज रिवाइवल’ की बैठक में पीएमएल-एन प्रमुख नवाज शरीफ और पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज ने इस ऐतिहासिक फैसले को मंजूरी दी थी। मुख्यमंत्री कार्यालय ने 20 मार्च को इसका आधिकारिक बयान भी जारी किया था। इस योजना के तहत विभाजन से पहले के हिंदू और सिख नामों वाली सड़कों (जैसे लक्ष्मी चौक, कृष्ण नगर, राम गली, और संत नगर) के मूल नाम वापस लौटाए जाने थे। फैसले की घोषणा के बाद कट्टरपंथी तत्वों और कुछ व्लागर्स ने इसे धार्मिक रंग देते हुए मरियम नवाज सरकार की तीखी आलोचना शुरू कर दी। इस विरोध और संभावित तनाव से डरकर सरकार बैकफुट पर आ गई। हालांकि, लाहौर के डिप्टी कमिश्नर मुहम्मद अली इज्जाज ने इसे ‘यू-टर्न’ मानने से इन्कार करते हुए कहा कि मामला अभी केवल चर्चा के चरण में है और अंतिम फैसला होना बाकी है। Post navigation मोजतबा खामेनेई की चुप्पी और IRGC की ताकत ने उठाए सत्ता परिवर्तन पर सवाल Bihar में भ्रष्टाचारियों की बढ़ी ‘निगरानी’,रडार पर 80 भ्रष्ट अधिकारी