Rishikesh : उत्साह के बीच हेमकुंड साहिब यात्रा शुरू

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ऋषिकेश, संवाददाता : 23 मई को हेमकुंड साहिब के कपाट खुलने से पहले बुधवार को लक्ष्मणझूला रोड स्थित हेमकुंड साहिब गुरुद्वारे से श्रद्धालुओं का पहला जत्था पंज प्यारों के नेतृत्व में रवाना हुआ। गुरुद्वारा परिसर जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल के जयघोषों और गुरबाणी से गूंज उठा। श्रद्धालुओं में हेमकुंड साहिब के दर्शन को लेकर खासा उत्साह दिखा।

दिल्ली के उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू, उत्तराखंड के परिवहन मंत्री प्रदीप बत्रा और परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने संयुक्त रूप से यात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इससे पहले पंज प्यारों का पारंपरिक सम्मान किया गया और संगत पर पुष्प वर्षा कर अभिनंदन हुआ।

अरदास के बाद जत्था हेमकुंड साहिब के लिए रवाना हुआ। उप राज्यपाल तरणजीत सिंह संधू ने कहा कि हेमकुंड साहिब की यात्रा भारतीय संस्कृति की उस परंपरा का प्रतीक है जहां आध्यात्मिकता और वीरता साथ चलती हैं। गुरु गोबिंद सिंह का संदेश आज के संघर्ष और हिंसा के दौर में मानवता को जोड़ने, निर्भय बनने और धर्म के लिए खड़े होने की प्रेरणा देता है।

यह यात्रा केवल पर्वतों की चढ़ाई नहीं, बल्कि अपने भीतर की यात्रा भी है

उन्होंने कहा कि यह यात्रा केवल पर्वतों की चढ़ाई नहीं, बल्कि अपने भीतर की यात्रा भी है। हेमकुंड की कठिन चढ़ाई धैर्य, अनुशासन और ईश्वर के प्रति समर्पण सिखाती है। हिमालय की गोद में स्थित यह धाम तप, सेवा, त्याग और ईश्वर से जुड़ाव का अनुभव कराता है। गुरु तेग बहादुर और गुरु गोबिंद सिंह का बलिदान मानव अधिकारों की रक्षा के लिए दिया गया सर्वोच्च त्याग है।

स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि हेमकुंड साहिब केवल तीर्थ नहीं, बल्कि तप, त्याग, सेवा और साहस की दिव्य भूमि है। गुरु गोबिंद सिंह ने धर्म और मानवता की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया। चारों साहिबजादों का बलिदान भारतीय इतिहास का स्वर्णिम अध्याय है। भारत की शक्ति उसकी आध्यात्मिक परंपराओं और विविध संस्कृतियों में है। गंगा, गुरबाणी और हिमालय का यह संगम विश्व को शांति, प्रेम और सहअस्तित्व का संदेश देता है। इस मौके पर मेयर शंभू पासवान, नरेंद्र जीत सिंह बिंद्रा आदि मौजूद रहे।

हेमकुंड यात्रा के लिए प्रशासन ने किया पुख्ता इंतजाम

सिखों के पवित्र तीर्थ हेमकुंड साहिब के कपाट 23 मई को श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे। बर्फबारी के कारण यह यात्रा हर साल मई-जून से अक्तूबर तक ही संचालित होती है। प्रशासन ने यात्रा मार्ग पर सुरक्षा और सुविधाओं के पुख्ता इंतजाम किए हैं।

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