कोलकाता, ब्यूरो : पश्चिम बंगाल में अवैध घुसपैठियों को बाहर निकालने की राज्य सरकार की मुहिम का जमीन पर बड़ा असर दिखने लगा है। पिछले साल नवंबर-दिसंबर में राज्य में SIR (स्टेट इनफिल्ट्रेशन रजिस्टर) की प्रक्रिया शुरू होने के बाद से ही अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों की वापसी का सिलसिला शुरू हो गया था, जो आज भी लगातार जारी है। हालांकि, आज हकीमपुर चेकपोस्ट पर तस्वीरें तो वही हैं, लेकिन बंगाल की सियासी और प्रशासनिक तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है।
बंगाल में सत्ता में आते ही मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने साफ चेतावनी दे दी थी कि राज्य से हर एक अवैध घुसपैठिए को बाहर जाना ही होगा। इसी कड़ी में पिछले रविवार को राज्य सरकार द्वारा जारी एक बड़े आदेश ने अवैध रूप से रह रहे नागरिकों की कमर तोड़ दी है।
हर जिले में बनेगा ‘होल्डिंग सेंटर’
राज्य सरकार ने एक आधिकारिक आदेश जारी कर बंगाल के हर एक जिले में ‘होल्डिंग सेंटर’ बनाने का निर्देश दिया है। इस आदेश के तहत राज्य में अवैध तरीके से रह रहे रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों को पकड़कर तब तक इन होल्डिंग सेंटरों में अस्थायी रूप से रखा जाएगा, जब तक कि उन्हें उनके देश वापस भेजने की कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती।
डीपोर्टेशन के डर से बॉर्डर पर पहुंचे सैकड़ों बांग्लादेशी
होल्डिंग सेंटर भेजे जाने और डिपोर्टेशन (देश निकाला) के इसी डर के कारण उत्तर 24 परगना जिले के हकीमपुर चेकपोस्ट पर इस समय बेहद चौंकाने वाले नजारे देखने को मिल रहे हैं। सैकड़ों की संख्या में बांग्लादेशी नागरिक, जो पिछले कई सालों से बंगाल में अवैध रूप से रह रहे थे, जिन्होंने यहां अपने घर बसा लिए थे और कामकाज भी कर रहे थे। अब स्वेच्छा से बांग्लादेश वापस जाने के लिए बॉर्डर पर कतारों में खड़े हैं।
बोरिया-बिस्तर समेटकर वापसी
चेकपोस्ट पर पुरुषों, महिलाओं और मासूम बच्चों की भारी भीड़ देखी जा सकती है। ये लोग अपने साथ घर का सारा सामान और बोरिया-बिस्तर समेटकर आए हैं।होल्डिंग सेंटर जाने की प्रताड़ना और कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए ये सभी नागरिक बॉर्डर पर इस इंतजार में बैठे हैं कि कब सीमा सुरक्षा बल (BSF) की तरफ से उन्हें सीमा पार कर बांग्लादेश जाने की हरी झंडी मिले।
