नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क :सोमवार को भारत आ रहे एलएनजी वाहक जहाज दिशा के होर्मुज से सुरक्षित गुजरने के बाद फारस की खाड़ी में फंसे 34 अन्य भारतीय और विदेशी झंडे वाले जहाजों के भारतीय बंदरगाहों तक सुरक्षित और तेजी से पहुंचने की उम्मीद बढ़ गई है। यह राहत ऐसे समय में मिली है जब अमेरिका और ईरान ने शांति समझौते पर हस्ताक्षर करने के फैसले की घोषणा की है। जहां उर्वरक से लदे 16 जहाजों की संभावित रवानगी से कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण पोषक तत्वों की आपूर्ति बढ़ाने में मदद मिलेगी, वहीं नीति निर्माता अभी भी आशंकित हैं। उन्हें चिंता है कि ऊर्जा आपूर्ति में सुधार से तत्काल राहत नहीं मिल सकती है, क्योंकि कतर के रास लाफान जैसे केंद्रों को भारी नुकसान पहुंचा है। सुविधाओं को हुए नुकसान के कारण ऊर्जा के क्षेत्र में तत्काल राहत संभव नहीं बेहतर ऊर्जा आपूर्ति से तत्काल राहत शायद ही मिले क्योंकि गैस प्लांट और अन्य सुविधाओं को हुए व्यापक नुकसान से यह अनिश्चितता पैदा हो गई है कि सामान्य परिचालन कब शुरू होगा। कतरएनर्जी की रास लाफान सुविधा के साथ भारत का दीर्घकालिक गैस आपूर्ति अनुबंध है। संयुक्त अरब अमीरात के हबशान गैस प्लांट को भी नुकसान पहुंचा है, जिससे परिचालन बाधित हुआ है। अधिकारियों ने कहा कि प्लांट की 60% क्षमता बहाल कर दी गई है। उन्हें उम्मीद है कि 2026 के अंत तक 80% रिकवरी हो जाएगी और 2027 में संरचनात्मक रूप से पूर्ण बहाली हो जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, कतरएनर्जी की रास लाफान सुविधा में दो तरलीकृत प्राकृतिक गैस प्रोसेसिंग यूनिट्स को नुकसान पहुंचा है, जिससे इसकी लगभग 17% क्षमता समाप्त हो गई है। भारत का ऊर्जा आयात और फंसे जहाजों का विवरण संघर्ष से पहले, भारत अपनी कच्चे तेल की आवश्यकता का 88% से अधिक आयात करता था, जिसका लगभग आधा हिस्सा पश्चिम एशिया से आता था। इसके अलावा 60% से अधिक आयातित एलएनजी भी होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरती थी। भारत अपनी एलपीजी आवश्यकताओं का लगभग 60% पश्चिम एशिया से प्राप्त करता था, जिसकी लगभग 90% आपूर्ति होर्मुज से होकर ही होती थी। जानकारी के मुताबिक, वर्तमान में खाड़ी में फंसे जहाजों में से 15 जहाज कच्चा तेल, एलएनजी और एलपीजी ले जा रहे हैं, जबकि शेष तीन जहाजों पर अन्य कार्गो लदा है। जहाजरानी मंत्रालय ने क्या कहा ? पश्चिम एशिया के हालिया घटनाक्रम पर पत्रकारों को जानकारी देते हुए, जहाजरानी मंत्रालय के निदेशक ओपेश कुमार शर्मा ने कहा, “एलएनजी वाहक ‘दिशा’ होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित रूप से गुजर गई है, और यह 62,370 टन एलएनजी कार्गो ले जा रही है। इस जहाज के संभावित तौर पर 18 जून को दाहेज पहुंचने की उम्मीद है।” वहीं, उर्वरक विभाग की संयुक्त सचिव वंदना प्रेयशी ने बताया कि इस महत्वपूर्ण जलडमरूमध्य में मौजूद कुल 16 उर्वरक जहाजों में से 8 जहाज यूरिया, 4 जहाज डाई-अमोनियम फॉस्फेट (DAP), 3 जहाज सल्फर और 1 जहाज अमोनिया लेकर आ रहा है। Post navigation एडवर्ड्स एयर फोर्स बेस से उड़ान भरते ही क्रैश हुआ अमेरिकी बॉम्बर B-52 सुप्रीम कोर्ट को पत्र लिखकर राम मंदिर चंदे में गड़बड़ी की जांच की मांग