नई दिल्ली , डिजिटल डेस्क : राष्ट्रीय स्तर पर एसआईआर विपक्ष के लिए बड़ा मुद्दा बना हुआ है। बड़े आरोप लगाए जा रहे हैं लेकिन यह सवाल वाजिब है कि जमीन पर क्यों चुप्पी है। देश भर में एसआईआर का यह काम राजनीतिक दलों से जुड़े करीब 25 लाख बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) की देखरेख में हुआ है। इनमें से आधे बीएलए विपक्षी दलों से जुड़े हुए थे, जो न सिर्फ नए मतदाता को बनाने बल्कि मृत, स्थानांतरित व अनुपस्थित मतदाताओं की पहचान में भी बीएलओ (बूथ लेवल अफसर) को मदद कर रहे थे। ऐसे में सवाल यह है कि जब विपक्षी दलों ने एसआईआर के दौरान बड़ी संख्या में बीएलए लगाए थे, तो फिर यह गड़बड़ी कैसे हो गई। आयोग के मुताबिक, एसआईआर के दौरान राजनीतिक दलों से जुड़े इन बीएलए के साथ मतदाता सूची में जुड़ने व हटने वाले मतदाताओं के नामों के साथ ड्राफ्ट सूची और बाद में अंतिम सूची भी साझा की गई थी। ड्राफ्ट सूची के बाद इन सभी आपत्तियां भी मांगी गई थीं। लेकिन कुछ राज्यों की गिनती की आपत्तियों को छोड़ दें, तो अधिकांश राज्यों से कोई आपत्ति नहीं की गई। इतना ही नहीं जिला स्तर पर जब मतदाता सूची तैयार होती है तो सभी दलों के जिला अध्यक्ष की बैठक बुलायी जाती है यह सवाल बिहार से लेकर अब तक हर राज्यों में है। इतना ही नहीं जिला स्तर पर जब मतदाता सूची तैयार होती है तो सभी दलों के जिला अध्यक्ष की बैठक बुलायी जाती है। उनसे मृत, स्थानांतरित और डुप्लीकेट हटाए गए मतदाताओं की सूची भी साझा की जाती है और हस्ताक्षर लिए जाते हैं। ऐसे में यह सवाल तो लाजिमी है की अगर कोई गड़बड़ी थी यो राजनीतिक दलों में निचले स्तर पर क्यों चुप्पी थी। बीएलए से लेकर जिला अध्यक्ष और प्रदेश अध्यक्ष सबकी भूमिका होती है और किसी भी स्तर पर सवाल क्यों नहीं उठाया गया। आयोग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक जिन राज्यों में एसआईआर हो चुका है या हो रहा है, उन सभी राज्यों में करीब 25 लाख बीएलए तैनात किए गए थे। इनमें भाजपा ने 6.52 लाख बीएलए तैनात किए थे, तो कांग्रेस ने चार लाख, बीएसपी ने 1.55 लाख, सपा ने 1.42 लाख, माकपा ने 79 हजार, आप ने 21 हजार व एनपीपी ने 15 बीएलए तैनात किए थे। इसके राज्यों में क्षेत्रीय दलों ने बड़ी संख्या में बीएलए तैनात किए थे। इसमें वह एक दिन में एसआईआर के पचास फॉर्म जमा करा सकते थे, जबकि दावे-आपत्तियों के दौरान वह प्रतिदिन दस आवेदन दे सकते थे चुनाव आयोग ने बीएलए को एसआईआर के दौरान बड़ी भूमिका भी थी। इसमें वह एक दिन में एसआईआर के पचास फॉर्म जमा करा सकते थे, जबकि दावे-आपत्तियों के दौरान वह प्रतिदिन दस आवेदन दे सकते थे। Post navigation भारत की स्वदेशी बुलेट ट्रेन कैसे बनाई जा रही है, अश्विनी वैष्णव ने शेयर किया वीडियो स्मृति मंधाना से छिन गया नंबर-1 का ताज, हरमनप्रीत कौर ने टॉप-10 में की वापसी