राष्ट्रपति मैक्रॉन ने विरोध के बावजूद पेंशन बिल को दी मंजूरी

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पेरिस,एनएआई : फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने देश भर में भारी विरोध के चलते , कर्मचारियों की रिटायरमेंट आयु को दो साल बढ़ाने के लिए पेंशन बिल पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इसी के साथ अब फ्रांस में रिटायरमेंट आयु 62 वर्ष से बढाकर 64 वर्ष कर दिया गया है। फ्रांस की संवैधानिक परिषद ने शुक्रवार को प्रमुख सेवानिवृत्ति-आयु कानून को स्वीकार किया था।

पेंशन पाने के लिए 43 वर्ष करना होगा कार्य

प्रमुख सेवानिवृत्ति-आयु कानून को शुक्रवार को फ्रांस की संवैधानिक परिषद द्वारा स्वीकार किया गया था, लेकिन इस कानून के लिए देश में महीने भर से विरोध-प्रर्दशन जारी है, देश वाशियो की मांग है कि इस कानून को वापस लिया जाए। फ्रांस की नौ सदस्यीय संवैधानिक परिषद ने इस प्रस्ताव को पेश किया था और इसमें रिटायरमेंट उम्र को बढ़ाने के साथ-साथ आवश्यक रोजगार के वर्षों की संख्या में भी इजाफा किया गया है। परिषद ने पाया कि यह बिल फ्रांसीसी कानून का अनुपालन करता है। वहीं, इसके बाद मैक्रॉन ने बिल पर दस्तखत कर दिए।

पेंशन सुधार योजना के कुछ भागों को फ्रांस की नौ सदस्यीय संवैधानिक परिषद ने 6 अन्य प्रस्तावों को खारिज भी कर दिया है। जिस प्रस्ताव को हटाया गया उनमें से एक है कि कंपनियां 55 साल से ज्यादा की उम्र वाले कितने लोगों को रोजगार देती हैं, इसकी जानकारी प्रकाशित नहीं की जाएगी। पेंशन बिल के तहत पूरी पेंशन के लिए जरूरी न्यूनतम सेवा काल की अवधि को भी बढ़ा दिया गया है। 2027 से लोगों को पूरी पेंशन लेने के लिए कुल 43 वर्ष कार्य करना होगा। जबकि अभी तक, न्यूनतम सेवा काल सिर्फ 42 वर्ष थी।

बिल के खिलाफ देश में विरोध रहेगा जारी

इस फैसले के पहले, प्रदर्शनकारियों ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन की सेवानिवृत्ति की आयु सीमा को बढ़ाकर 64 वर्ष करने की अलोकप्रिय योजना का भारी विरोध चल रहा है, और पूरे फ्रांस के शहरों और गांवों में मार्च किया जा रहा है । प्रर्दशनकारियों ने कहा कि एक मई को श्रमिक दिवस के मौके पर इस योजना के विरोध में देशव्यापी प्रर्दशन किया जाएगा। उन्होंने कहा जब तक इस बिल को वापस नहीं लिया जाएगा तब तक विरोध जारी रहेगा।

फ्रांस के नागरिक पेंशन सुधार के खिलाफ महीनों से चल रहे विरोध आंदोलन का हिस्सा बन रहे हैं जिसने फ्रांस और मैक्रॉन की इस योजना से सामाजिक तनाव बढ़ गया है। इस पेंशन बिल के कारण राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन की लोकप्रियता फ़्रांस में जबरदस्त गिरावट आई है।

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