हैदराबाद , संवाददाता : प्रतिबंधित संगठन माकपा (माओवादी) केंद्रीय समिति के सदस्य और 25 लाख के इनामी पसुनूरी नरहरि उर्फ विश्वनाथ ने मंगलवार को तेलंगाना के डीजीपी सीवी आनंद के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया।
दानम्मा को लता के नाम से भी जाना जाता है
नरहरि माकपा (माओवादी) की बिहार-झारखंड विशेष क्षेत्र समिति (बीजेएसएसी) का सचिव भी है। नरहरि की पत्नी और 20 लाख की इनामी मेदारा दानम्मा ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया है। दानम्मा को लता के नाम से भी जाना जाता है।
आनंद ने कहा, नरहरि और दनम्मा के आत्मसमर्पण से माकपा (माओवादी) को बड़ा झटका लगा है। इसके साथ ही संगठन का आखिरी बचा पूर्वी क्षेत्रीय ब्यूरो (ईआरबी) भी पतन के कगार पर है।
माओवादी दंपती डेंगू और मलेरिया से पीड़ित थे
डीजीपी ने बताया कि माओवादी दंपती डेंगू और मलेरिया से पीड़ित थे। तेलंगाना पुलिस पिछले 10 दिनों से एक अस्पताल में उनका इलाज करवा रही थी। नरहरि ने उन्होंने माकपा (माओवादी) में विभिन्न पदों पर कार्य किया। उसे 2017 में केंद्रीय समिति में शामिल किया गया था। उसे मोर्टार और रॉकेट-चालित ग्रेनेड बनाने, बिछाने में भी महारत हासिल है।
वहीं, दानम्मा ने 1988 में नरहरि से शादी के बाद झारखंड में उसके साथ काम किया। दानम्मा को 2004 में नागपुर में गिरफ्तार किया गया और सात साल की जेल हुई। जमानत के बाद वह फिर से भूमिगत हो गई और 2018 में बिहार-झारखंड विशेष क्षेत्र समिति की सदस्य बन गई।
264 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया
तेलंगाना सरकार की पुनर्वास नीति के तहत, नरहरि को 25 लाख रुपये और दानम्मा को 20 लाख रुपये की राशि डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से सौंपी गई।डीजीपी ने बताया कि तेलंगाना में इस साल अब तक 264 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है।
तेलंगाना से केवल तीन भूमिगत कैडर वर्तमान में राज्य के बाहर माकपा (माओवादी) के विभिन्न संगठनों में काम कर रहे हैं, उनमें केंद्रीय समिति के सदस्य मुप्पला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति भी है।
डीजीपी ने कहा, छत्तीसगढ़ और ओडिशा में 15-15, झारखंड में 13, तेलंगाना में तीन और आंध्र प्रदेश में एक कैडर समेत इस समय देश में 47 भूमिगत कैडर हैं। आधुनिक भारतीय समाज में माओवादी विचारधारा के लिए अब कोई जगह नहीं है।
नरहरि ने कहा कि दंडकारण्य, झारखंड और देश के अन्य हिस्सों में संगठन को हुए नुकसान के कारण माकपा (माओवादी) का सशस्त्र संघर्ष कठिन हो गया है।
